केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर जारी सरगर्मियों के बीच कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की है। मुलाकात को लेकर भले ही आधिकारिक तौर पर कुछ कहा नहीं गया है। मगर इसे कैबिनेट में फेरबदल से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार और संगठन में राहुल की भूमिका बढ़ाने को लेकर काफी लंबे समय से चर्चा चल रही है।
हालांकि सरकार में उनके शामिल होने को लेकर कोई संकेत नहीं है, जबकि संगठन में शामिल होने को लेकर कांग्रेस के कई दिग्गज संकेत दे चुके हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्र इस हफ्ते की बजाय दशहरे के बाद ही सरकार का चेहरा बदलने के संकेत दे रहे हैं।
मंगलवार को प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से अलग-अलग मुलाकात के बाद बुधवार को राहुल की मनमोहन से मुलाकात के बड़े राजनीतिक निहतार्थ लगाए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल में विस्तार के साथ ही भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से मौजूदा राजनीतिक संकट भी इस मुलाकात की अहम वजह माना जा रहा है।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि सरकार और पार्टी की खो रही साख को दुरुस्त करने का दबाव प्रधानमंत्री और सोनिया समेत राहुल पर भी है। इसी के चलते राजनीतिक मुलाकातों का दौर तेज हो गया है। दूसरी तरफ सूत्रों का कहना है कि दशहरे बाद ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल को अंतिम रूप देने पर विचार किया जा रहा है।
राष्ट्रपति 22 से 28 जून तक दुर्गा पुजा के मौके पर कोलकाता में रहेंगे। प्रधानमंत्री से राहुल की मुलाकात के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि सरकार का नया चेहरा राहुल की इच्छा के मुताबिक भी तय होगा। इसीलिए मंत्रिमंडल में कई युवा चेहरों को शामिल किया जा सकता है।
मीनाक्षी नटराजन, माणिक टैगोर और मनीष तिवारी का नाम सबसे ऊपर है। जबकि राहुल के खास चेहरों में गिने जाने वाले सचिन पायलट, ज्योतिरादित्य सिंधिया और जितिन प्रसाद का प्रमोशन भी राज्यमंत्री स्वतंत्र के तौर पर होने की संभावना को नकारा नहीं जा रहा है।
खुद राहुल के मंत्रिमंडल में शामिल होने को लेकर काफी लंबे समय से चर्चा चल रही है। कांग्रेस में उनकी भूमिका बढ़ाने की भी बात है। मगर पार्टी के सूत्र उनके सरकार में शामिल होने को लेकर कोई संकेत नहीं दे रहे हैं। जबकि पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह और सलमान खुर्शीद जैसे कई नेता उन्हें कांग्रेस संगठन में ही बड़ी भूमिका देने की वकालत कर चुके हैं।