उत्तर प्रदेश कांग्रेस में जान फूंकने के मकसद से बनाए गए जोनल अध्यक्षों के कामकाज से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी असंतुष्ट हैं।
लिहाजा जोनल अध्यक्षों में फेरबदल हो सकता है। जोनल प्रणाली को खत्म करने के विकल्प पर भी विचार संभव है।
राहुल ने दिग्विजय सिंह और निर्मल खत्री को नए नाम सुझाने को कहा है।
प्रदेश कांग्रेस के जिलाध्यक्षों में अभी तक लगभग 60 फीसदी बदलाव हो गया है, जबकि आगे और फेरबदल होना तय है।
इसी महीने प्रदेश कांग्रेस में बदलाव का ऐलान हो सकता है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद प्रदेश कांग्रेस में शुरू की गई जोनल प्रणाली के नतीजों से आलाकमान असंतुष्ट हैं।
खुद कांग्रेस उपाध्यक्ष अब इसे कारगर नहीं मान रहे है। प्रदेश अध्यक्ष को ज्यादा ताकत देने के विचार पर अमल करने की बात चल रही है।
साथ ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष निर्मल खत्री की ओर से कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह को सौंपी गई रिपोर्ट में जोनल अध्यक्षों की कामकाज को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।
कहा गया है कि इन्होंने अपने अपने क्षेत्रों के दौरे ही पूरे नहीं किए है। जोनल अध्यक्ष संगठन को पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं।
जोनल अध्यक्षों की इसी प्रणाली को देखते हुए राहुल अब फुल टाइमर अध्यक्षों की तैनाती कर रहे हैं। दिग्विजय ने इस सिलसिले में प्रदेश के कई नेताओं से बात की है। नए नाम जल्द से जल्द तय करने की बात है।
दिग्विजय ने तीन अप्रैल को ही प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी। बैठक में जोनल अध्यक्षों को बदलने पर चर्चा हुई थी।
दूसरी तरफ प्रदेश कांग्रेस में बड़े पैमाने पर पुनर्गठन की प्रक्रिया को 30 अप्रैल तक पूरा करने के निर्देश दिए गए है।
अमर उजाला ने चार अप्रैल को इस सिलसिले में खबर भी प्रकाशित की थी। सूत्रों का कहना है कि अभी 60 फीसदी जिलाध्यक्ष बदल दिए गए हैं, जबकि 10 से 15 फीसदी जिलाध्यक्ष और बदले जाने हैं।
कौन-कौन हैं जोनल अध्यक्ष
अभी उत्तर प्रदेश कांग्रेस में आठ जोनल अध्यक्ष हैं। इनमें राज्यसभा सांसद राशिद मसूद, पूर्व सांसद चौधरी बिजेंद्र सिंह, सांसद राजाराम पाल, विधायक विवेक सिंह, विधायक अनुराग नारायण सिंह, केंद्रीय राज्यमंत्री आरपीएन सिंह, सांसद, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनिया और केंद्रीय राज्यमंत्री जीतिन प्रसाद शामिल हैं।