जहां-जहां चुनाव होते हैं, राहुल वहां नजर आते हैं। पंजाब और यूपी में राहुल ने खूब प्रचार किया, लेकिन नतीजे सबके सामने हैं। उन्होंने पार्टी को एक भी चुनाव नहीं जितवाया है। यानी राहुल कहीं नहीं चलते, फिर भी उनकी चलती है। हर ओर खबर है कि रविवार को हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल के बड़े फेरबदल में उन्हीं की चली है। यही नहीं, उन्हें अब पार्टी में और बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी।
मिशन 2014 यानी आगामी आम चुनावों के मद्देनजर कैबिनेट में हुए बदलाव के साथ अब कांग्रेस पार्टी में महत्वपूर्ण बदलाव किए जाने हैं। पूरी संभावना जताई जा रही है कि जिस तरह कैबिनेट में यंग ब्रिगेड को प्रमुखता से आगे किया गया, पार्टी की बागडोर बतौर नंबर 2 राहुल गांधी को सौंपी जा सकती है। राहुल को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष या महासचिव का पद दिया जा सकता है।
सूत्रों का कहना है कि राहुल खुद को चुनावी लिहाज से सक्रिय करना चाहते हैं, जबकि संगठन के अन्य मामलों को निपटाने की जिम्मेदारी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के हाथों में ही रहेगी। राहुल गांधी क्षेत्रीय स्तर पर अपनी नई टीम को मूर्त रूप देने में जुटे हुए हैं। राहुल गांधी के एक करीबी सहयोगी ने बताया कि पिछले कुछ समय से राहुल ने देशव्यापी स्तर पर अपने चुनावी दौरे बढ़ा दिए हैं। वह जहां जा रहे हैं, वहां से अनुभवी और युवा दोनों तरह के मेहनती चेहरों को साथ जोड़ने का काम कर रहे हैं।
राहुल की नई टीम में कई लोगों के अलग-अलग क्षेत्रों से आने की संभावना है। राहुल की कोशिश संगठन को मजबूत करने के साथ ही उसे चुनावों में जीत हासिल करने वाली टीम तैयार करने की है। इसी लिहाज से चुनावी वार रूम में अनुभवी लोगों को शामिल करने पर काम चल रहा है। केंद्र सरकार से इस्तीफा देने वाली अंबिका सोनी और मुकुल वासनिक को इसलिए संगठन में लाया गया है। साथ ही जयराम रमेश को भी कांग्रेस वार रूम की जिम्मेदारी दी जाएगी। संगठन में फेरबदल में कई लोगों को बाहर का दरवाजा भी दिखाया जा सकता है।
अब तक वंशवाद के आरोप झेलने वाली कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि कांग्रेस में युवाओं और वंशवाद से इतर नेताओं के लिए अच्छी-खासी गुंजाइश है। वैसे बता दें कि यह पहली बार है जब राहुल गांधी का कैबिनेट में किसी तरह के फेरबदल को ले कर पीएम से डिसकशन हुआ हो।