लोकसभा चुनाव और फिर चार राज्यों में मिली करारी हार से हताश कांग्रेस हाईकमान ने आखिरकार चुनावों में अपनी फजीहत के लिए बड़े नेताओं को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी हाईकमान ने साफ शब्दों में कहा कि उसे भाजपा नहीं बल्कि बड़े नेताओं और मंत्रियों की वजह से हार का सामना करना पड़ा।
वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी सख्त लहजों में कहा कि सत्ता की ताकत हाथ में आने के बाद यूपीए सरकार के मंत्री कांग्रेस को जिंदा मारने के लिए उत्तरदायी हैं। दूसरी तरफ सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए पार्टी नेताओं को जनता के दरबार में जाकर काम करने की नसीहत दी।
हाईकमान के कड़े रुख को देखते हुए राहुल को पार्टी अध्यक्ष बनाने की मांग करने वाले नेताओं की इस बारे में बोलने की हिम्मत तक नहीं हुई। पार्टी ने मोदी सरकार के खिलाफ भूमि अधिग्रहण समेत अन्य मुद्दों को लेकर देशव्यापी आंदोलन चलाने की योजना बनाई है। इसकी कमान सोनिया और राहुल गांधी संभालेंगे।
राहुल ने दिए पार्टी में बड़े बदलाव के संकेत
कांग्रेस कार्यसमिति की मंगलवार को हुई बैठक में हाईकमान ने पार्टी संगठन में बड़े बदलाव के संकेत भी दिए। भले ही संगठन में बदलाव में देरी हो लेकिन सिलसिलेवार हार के बाद पार्टी हाईकमान ने बैठक में संदेश दे दिया है कि कांग्रेस को फिर से खड़ा करने के लिए पार्टी की जिम्मेदारी दूसरों के कंधों पर देने की जरूरत महसूस की जा रही है।
साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि हाईकमान अपनी टीम में उनको ही रखेगी जोकि पार्टी को जमीन पर स्थापित करने का दम रखते होंगे। बैठक में हाईकमान के खुद के कमजोर पड़ने के आरोपों को धोने की कोशिश की। राहुल और सोनिया दोनों ने बड़े नेताओं को गुटबाजी और अंतर्कलह छोड़कर मोदी सरकार के खिलाफ ताल ठोकने के लिए कहा है।
जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था बनाने पर विचार
कांग्रेस के संविधान और ढांचे में बड़े स्तर पर बदलाव की बात शुरू हुई है। कार्यकर्ताओं से राय ली जाएगी कि क्या पार्टी संगठन में भी अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यकों को तयशुदा आरक्षण के जरिए जगह दी जाए। बैठक में पार्टी का संगठन बढ़ाने और ढांचे की नए सिरे से व्यवस्था करने पर भी चर्चा हुई।
हालांकि मंगलवार को कार्यसमिति की बैठक में कोई फैसला नहीं हुआ और जिला स्तर के कार्यकर्ताओं की राय लेने के बाद ही अंतिम रूप देने पर सहमति बनी है। पार्टी अध्यक्ष और पदाधिकारियों के कार्यकाल को तीन से पांच साल करने या फिर पांच से तीन साल करने को लेकर भी विचार विमर्श हुआ।
संगठन ने इस पर भी मंथन किया कि युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, सेवा दल, महिला कांग्रेस की अलग सदस्यता हो या फिर सभी पार्टी सदस्य बनें और अपनी उम्र, लिंग, रुचि के हिसाब से काम करें। लगभग तीन घंटे चली बैठक में बूथ लेवल पर चुनाव प्रक्रिया या फिर जिला स्तर पर भी चुनाव प्रक्रिया शुरू करने को लेकर भी बात हुई।