कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के कमान संभालने के बाद अब पार्टी में उम्मीदवारों के चयन की सालों पुरानी प्रक्रिया बदल गई है।
दरअसल, प्रदेश चुनाव समिति के बाद स्क्रीनिंग कमेटी और फिर पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) की बैठक होने के बाद सूची जारी हो जाती है।
मगर अब केंद्रीय चुनाव समिति से पहले एक और पड़ाव से उम्मीदवारों की सूची को फाइनल होने के लिए गुजरना होगा। यह पड़ाव राहुल गांधी का है।
जोकि हर राज्य की केंद्रीय चुनाव समिति से पहले सीटवार उम्मीदवारों की सूची की समीक्षा करेंगे।
बृहस्पतिवार को राहुल ने यह कसरत शुरू कर दी। छत्तीसगढ़ के प्रभारी कांग्रेस महासचिव बीके हरिप्रसाद के नेतृत्व में प्रदेश के नेताओं ने 18 उम्मीदवारों की सूची राहुल के सामने पेश की।
छत्तीसगढ़ की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक शुक्रवार को दोपहर में होने की संभावना है। इससे पहले राहुल ने खुद हर सीट पर उम्मीदवारों के बारे में नेताओं से पूछा।
उम्मीदवार को टिकट देने का कारण और उसकी जीत की संभावना के बारे में पूछा। यही नहीं, राहुल ने यहां तक पूछा कि किन किन बड़े नेताओं ने इन नामों की सिफारिश की है और उनकी जिम्मेदारी तय करने की बात भी कही है।
सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय चुनाव समिति में भी राहुल के शामिल होने की बात है। मगर वह इससे पहले खुद चुनावी तैयारियों की समीक्षा करना चाहते हैं।
दरअसल, उपाध्यक्ष की कुर्सी संभालने के बाद पहली बार विधानसभा चुनाव की जंग राहुल के सामने हैं। इसलिए वह किसी तरह का जोखिम लेना नहीं है।
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर नरेंद्र मोदी के ऐलान के बाद तो वह और सतर्क हो गए है। बैठक में छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष चरण दास महंत और विधायक दल के नेता रविंद्र चौबे भी शामिल थे।
छत्तीसगढ़ में सबसे पहले चुनाव होने है। 11 नवंबर को मतदान का पहला चरण है। इसलिए पार्टी ने जल्द ही उम्मीदवारों की सूची जारी कर ली है।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अब टिकट प्रक्रिया तीन पड़ाव नहीं बल्कि चार हो गए। इससे उम्मीद है कि प्रक्रिया और चुस्त होगी और परिणाम बेहतर आएंगे।