सितंबर, 2008 को दिल्ली के जामिया नगर इलाके में स्थित बटला हाउस में इंडियन मुजाहिदीन के दो आतंकवादियों को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मुठभेड़ में मार गिराया था।
मुठभेड़ के दौरान एक आतंकी को गिरफ्तार किया गया, जबकि दो फरार होने में कामयाब रहे थे।
मुठभेड़ के दौरान कई वीरता पदक जीत चुके दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा शहीद हो गए तथा हेड कांस्टेबल बलवान सिंह घायल हो गए थे।
शर्मा के मारे जाने पर भी खासा विवाद हुआ था। मुठभेड़ की असलियत पर सवालिया निशान लगाए गए।
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इस मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों के नाम थे आतिफ उर्फ बशीर और साजिद। इसके अलावा मोहम्मद सैफ को गिरफ्तार किया गया।
फ्लैट से एक एके-47, .30 बोर की रिवॉल्वर, दो लैपटॉप, आधा दर्जन मोबाइल फोन और छह पेन ड्राइव बरामद हुए थे।
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सभी आतंकी 13 सितंबर, 2008 को दिल्ली में हुए सीरियल बम विस्फोट के आरोपी थे और आजमगढ़ के रहने वाले थे।
मुठभेड़ फर्जी नहीं
मुठभेड़ के बाद कई राजनीतिक दलों ने इसे फर्जी करार देते हुए इसकी जांच कराने की मांग की थी। जनवरी, 2009 में फॉरेंसिक जांच के रिपोर्ट में मुठभेड़ को सही करार दिया गया।
जुलाई 2009 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एनकाउंटर मामले में पुलिस को क्लीन चिट दे दी।
अगस्त, 2009 को दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को क्लीनचिट देने संबंधी मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट को स्वीकारते हुए इसकी न्यायिक जांच का निर्देश देने से इंकार कर दिया।