हैदराबाद में बृहस्पतिवार को हुए धमाकों की संसद के दोनों सदनों में शुक्रवार को सभी दलों ने एक स्वर में तीखी निंदा की। इन दलों ने कहा कि यदि सरकार के पास पहले से इसकी जानकारी थी तो समय रहते उचित कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
विपक्ष के साथ सरकार के सहयोगी दलों ने भी कहा कि जब आतंकवाद की लड़ाई में पूरा देश एक जुट है तो सरकार के सामने ऐसी कौन सी कमजोरी है कि इस तरह की घटनाएं रुक नहीं रही हैं।
लोकसभा में इस मामले को उठाते हुए माकपा के बासुदेव आचार्य ने कहा कि हैदराबाद में राष्ट्रीय अपराध निरोधक केंद्र की मौजूदगी के बावजूद आतंकी हमलों की तीन घटनाएं हो चुकी हैं। यह घटना कैसे हुई इसका जवाब केंद्र और राज्य दोनों को देना होगा।
सपा नेता मुलायम सिंह यादव ने इस पर हैरानी जताई कि पहले ही खुफिया सूचना मिलने के बावजूद आतंकी अपनी करतूतों को अंजाम देने में कैसे सफल हो जाते हैं। ऐसे में देश की सुरक्षा कैसे होगी।
मुलायम ने कहा कि सभी दलों का समर्थन मिलने के बावजूद आतंकी हमलों को सरकार क्यों नहीं रोक पा रही है। सरकार बताए कि उसकी क्या कमजोरी है।
बसपा के दारा सिंह चौहान ने जानना चाहा कि केंद्र के राज्य को आतंकी हमले की आशंका की सूचना दिए जाने के बावजूद चूक कहां हुई इसकी जांच होनी चाहिए।
जदयू के शरद यादव ने कहा कि खुफिया सूचना के बावजूद ऐसी घटनाएं हो जाने से इस बात की पुष्टि होती है कि यह सरकार लुंज-पुंज है। तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में उनका दल पूरी तरह से सरकार के साथ है। सरकार जो भी कदम उठाएगी, पार्टी उसका समर्थन करेगी।
बीजद के भृतुहरि महताब ने कहा कि अमेरिका में 9/11 के बाद कोई आतंकी घटना नहीं हुई। ब्रिटेन में भी सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है। ऐसी स्थिति भारत में क्यों नहीं बन पा रही है।
वहीं, राज्यसभा में बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि धमाकों से बचा जा सकता था। केंद्र के पास इसकी सूचना पहले से थी तो सुरक्षा बलों को सतर्क क्यों नहीं किया गया।
सपा नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि केंद्र सामान्य अलर्ट जारी कर आतंकवाद से लड़ाई का मामला राज्यों पर छोड़ अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। उनका कहना था कि आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक वार के लिए सरकार में इच्छाशक्ति नहीं है।