मुलायम सिंह यादव का मंदिर बनने से पहले ही उत्तर प्रदेश और देश में चर्चा का विषय बन गया है। अलीगढ़ के नगला माली से शुरू हुआ यह मामला अब लखनऊ और दिल्ली के सियासी गलियारों की सुर्खियों में छाया है। सवाल एक ही है-समाजवाद की विचाराधारा बड़ी है या फिर भक्ति करने जैसा जनसमर्थन?
हालांकि मंगलवार को मैनपुरी में प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस सवाल का जवाब भी दे दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कोई अपने पैसे से मंदिर बनवा रहा है तो बनवाये। सीएम के इस बयान से मंदिर समर्थकों का जोश अब दोगुना हो गया है। मंदिर समर्थकों ने रणनीति बनाकर अब इस मुद्दे पर सीधे मुलायम सिंह यादव से मिल कर अपनी बात रखने का फैसला किया है। जल्द ही समर्थक नई दिल्ली में सपा सुप्रीमो से मिल कर अपनी ‘भक्ति’ का सबूत देंगे।
समर्थकों का कहना है कि वह मंदिर बनाकर मुलायम सिंह के जनकल्याणकारी फैसलों का प्रचार प्रसार करना चाहते हैं ताकि हरेक पात्र व्यक्ति को इसका फायदा मिल सके। मंगलवार को ही प्रदेश सचिव एसआरएस यादव के दखल के बाद मंदिर निर्माण अस्थायी तौर पर रुकवाया गया था। लेकिन अब इसके दोबारा से शुरू होने की उम्मीद बंध गयी है।
मंदिर निर्माण में अगुवा रहे सोनू सैनी और राम प्रसाद सैनी ने कहा कि वह जल्द ही सपा सुप्रीमो से मिल कर आगे का फैसला करेंगे। मंदिर बनाना उन लोगों का व्यक्तिगत निर्णय है इसलिए पार्टी की विचाराधारा पर इसका सीधे तौर पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
मथुरा-वृंदावन सीट से सपा प्रत्याशी रहे राजेश सैनी ने कहा कि सपा सुप्रीमो से वार्ता करने के बाद ही वह इस मुद्दे पर कुछ कहेंगे क्योंकि इस फैसले से सीधे तौर पर उनका कोई लेनादेना नहीं रहा है। वह समर्थकों की ‘मुलायम-भावनाओं’ को ठेस पहुंचाने का कोई काम नहीं करेंगे और पार्टी की विचाराधारा पर भी कायम रहेंगे। फैसला पार्टी आलाकमान और समर्थकों को मिलकर करना है।