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बनारस में मोदी के खिलाफ दो दुश्मन हुए दोस्त

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तमाम कयासों के विपरीत कौमी एकता दल ने वाराणसी में कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय को समर्थन करने का फैसला किया है।
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कौमी एकता दल अध्यक्ष अफजाल अंसारी ने मंगलवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि कांग्रेस ही सेक्यूलरिज्म के खिलाफ में लड़ने में सक्षम है। कांग्रेस ने उनकी पार्टी से समर्थन भी मांगा था, इसलिए पार्टी ने अजय राय को समर्थन करने का फैसला किया है।

अफजाल ने कहा, 'कांग्रेस प्रत्याशी के साथ हमारे व्यक्तिगत रिश्ते ठीक नहीं रहे हैं, लेकिन वे मजबूत प्रत्याशी हैं और पांच बार विधायक रह चुके हैं। नरेंद्र मोदी को चुनौती देने में वही सक्षम है।'
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कौएद ने की थी साझा प्रत्याशी की मांग

अपनी प्रेस कांफ्रेंस में कौएद अध्यक्ष ने साझा प्रत्याशी की अपनी पुरानी मांग एक बार फिर जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि कौमी एकता दल ने वाराणसी में भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र मोदी के खिलाफ साझा प्रत्याशी की मांग की थी। लेकिन हमारी मांग सुनी नहीं गई। इसलिए हमने अपने प्रत्याशी को हटा दिया।

अफजाल ने कहा कि देश में सेक्यूलर सरकार बनाने में कांग्रेस ही सक्षम है। कांग्रेस यदि सत्ता में नहीं आई तो किसी गठबंधन को समर्थन देकर सेक्‍ूयलर सरकार बना सकती है।

मैदान से हट गए थे मुख्तार अंसारी

कौमी एकता दल की ओर से इस बार मुख्तार अंसारी को लोकसभा प्रत्याशी बनाए जाने की संभावना थी। पार्टी ने अन्य दलों से उन्हें वाराणसी में नरेंद्र मोदी के खिलाफ साझा प्रत्याशी बनाने के मांग की थी।

लेकिन किसी भी पार्टी ने उस प्रस्ताव को तवज्जो नहीं‌ दिया, जिसके बाद मुख्तार मैदान से हट गए। मुख्तार प‌िछले चुनाव में बसपा की ओर से लोकसभा प्रत्याशी थे और भाजपा प्रत्याशी मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ दूसरे स्‍थान पर रहे थे।

2009 में अजय राय ने सपा से चुनाव लड़ा था और तीसरे स्‍थान पर रहे थे। उन चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी राजेश मिश्रा चौथे स्‍थान पर रहे थे।
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कयासों का बाजार ‌‌था गर्म

वाराणसी में पिछले कई दिनों से कौमी एकता दल के समर्थन को लेकर कयासों का बाजार गर्म था।

सियासी गलियारों में अटकलें लगाई जा रही हैं कि कौएद पुराने अंतर्विरोधों को दरकिनार करते हुए कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय को समर्थन दे सकता है वहीं आम आदमी पार्टी को समर्थन देने की बात भी की जा रही थी।

चंद दिनों पहले एक ऐसा पत्र भी सामने आया था, जिसमें आप ने कौएद से समर्थन मांगा था। हालांकि आप ने ऐसे पत्र से इनकार किया था और उसे भाजपा की सजिश बताया था। अफजाल ने भी कहा कि आप ने उनसे समर्थन नहीं मांगा था।
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