जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सियासत के दोस्तों और दुश्मनों को पहचानना मुश्किल हो रहा है। रोजाना नए रिश्ते बन रहे, दोस्त दुश्मनों की तारीफ कर रहे हैं और दुश्मन दोस्ती के लिए हाथ बढ़ा रहे हैं।
कांग्रेस और एनसीपी के रिश्ते में भी ये समीकरण बखूबी दिख रहे हैं। दोनों के रिश्तों में कभी गरमाहट दिख रही और कभी बिलकुल ही ठंडक।
राजनीति के माहिरों में एक शरद पवार ये खेल यों ही खेल रहे हैं या ये वाकई कांग्रेस से सौदेबाजी का एक तरीका है? भाजपा के साथ जाना उनके लिए आसान भी नहीं दिख रहा, क्योंकि शिवसेना रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा बनकर खड़ी है।
अधिक सीटें हथियाने का ये तरीका तो नहीं?
आगामी लोकसभा चुनाव के लिए महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी के बीच अब तक कोई समझौता नहीं हो सका है। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार का कहना है कि अगले दस दिनों में दोनों दलों में सीटों के बंटवारा हो जाएगा।
महाराष्ट्र में लोकसभा की 48 सीटें हैं और एनसीपी का 9 सीटों पर कब्जा है। पार्टी इस बार अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है, लेकिन कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे पर समझौता न होने के कारण उन्हें ये योजना खटाई में पड़ती दिख रही है।
यही वजह है उनके नेता नए विकल्पों की भी बात कर रहे हैं। पार्टी नेता प्रफुल्ल पटेल ने हाल ही में कहा था कि कांग्रेस के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर हो रही देरी से एनसीपी सब्र खो रही है और दूसरे विकल्प पार्टी के पास खुले हैं।
हालांकि खुद पवार ने एनडीए में शामिल होने से से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि सीटों के बंटवारे पर दोनों दलों के बीच बातचीत हो रही है।
पवार भी नहीं मानते मोदी को दंगों का दोषी
प्रफुल्ल पटेल की तरह ही शरद पवार भी नरेंद्र मोदी को गुजरात दंगों के लिए जिम्मेदार नहीं मानते। रविवार को उन्होंने प्रफुल्ल पटेल के नरेंद्र मोदी को लेकर दिए उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें कहा गया था कि गुजरात दंगों में मोदी की भूमिका पर कोर्ट के फैसले के बाद बहस की गुंजाइश खत्म हो गई है।
एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि अगर अदालतों ने गुजरात दंगों में मोदी की भूमिका को लेकर फैसले सुना दिए हैं तो फिर बहस का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि हमने अदालत के फैसले को मान लिया है इसलिए अब इस पर कोई बहस नहीं होनी चाहिए।
प्रफुल्ल पटेल ने हाल ही में कहा था कि गोधरा कांड के बाद गुजरात में हुए दंगों में मोदी की भूमिका को लेकर अदालत के फैसले को मान लेना चाहिए, क्योंकि न्याय पाने के लिए न्यायिक प्रणाली ही एकमात्र रास्ता है।
पटेल का ये बयान कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के उस बयान के बाद आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि गुजरात दंगों के लिए नरेंद्र मोदी जिम्मेदार हैं।
पवार और मोदी के मुलाकात की भी है अफवाह
हाल ही में एक मराठी अखबार में शरद पवार और नरेंद्र मोदी के मुलाकात की खबरें भी छपी थीं। हालांकि शरद पवार ने नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात की खबरों का खंडन करते हुए उन्हें शरारतपूर्ण, निराधार और गलत बताया।
खबर में दावा किया गया था कि पवार और मोदी की 17 जनवरी को लगभग एक घंटे की मुलाकात हुई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि इस बैठक में दोनों नेताओं ने नए गठबंधन के बारे में चर्चा की थी।
भले ही पवार मोदी से नजदीकियों से इनकार कर रहे हों लेकिन एनसीपी नेताओं का मोदी-प्रेम बाद में भी दिखा।
एनसीपी प्रवक्ता डीपी त्रिपाठी ने भी हाल ही में नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की तुलना करते हुए राहुल को मोदी से कम अनुभवी बताया था। डीपी त्रिपाठी ने कहा था कि मोदी गुजरात में तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इसलिए उन्हें प्रशासनिक अनुभव ज्यादा है।
शिवसेना ने किया BJP-NCP गठबंधन का विरोध
महाराष्ट्र में भाजपा की पुरानी साझीदार शिवसेना NCP के साथ उसके रिश्तों की सबसे बड़ी विरोधी है। शिवसेना का कहना है कि एनसीपी एक अवसरवादी पार्टी है और उसके साथ गठबंधन से एनडीए को नुकसान होगा।
महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना एनसीपी की पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी भी है। 15वीं लोक सभा में शिवसेना की 8 सीटें है। शिवसेना के तेवरों को देखते हुए BJP और NCP के रिश्तें परवान चढ़ने की संभावना कम ही दिखती है।