आतंकवादी देविंदर पाल सिंह भुल्लर की फांसी पर रोक लगाने की सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर बादल ने इस मसले को सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समक्ष उठाकर गरमा दिया।
सुप्रीम कोर्ट से भुल्लर की फांसी का रास्ता साफ होने के बाद मामले को नया तेवर देते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री से साफ कहा कि अगर पंजाब में शांति बनाए रखना चाहते हैं तो भुल्लर की फांसी को माफ कर दिया जाना चाहिए। उसकी सजा को उम्रकैद में बदला जा सकता है।
यही नहीं दोनों नेताओं ने इस मुद्दे पर भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह से भी मुलाकात की। दूसरी ओर कांग्रेस ने कानूनी प्रक्रिया में दखलंदाजी नहीं करने की बात कहकर इस मामले पर अब तक अपना रुख साफ नहीं किया है।
बादल ने प्रधानमंत्री से इस मुद्दे पर हुई अपनी मुलाकात में बाकायदा भुल्लर की फांसी को उम्रकैद में तब्दील करने के लिए उन्हें एक ज्ञापन भी सौंपा। बादल ने प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद बताया कि उन्होंने पीएम से यही कहा है कि इस मामले का कोई रास्ता निकाला जाए, जिससे भुल्लर की फांसी माफ हो सके।
भुल्लर की फांसी माफ होने पर गलत संदेश जाने की बात पर बादल ने कहा कि पंजाब को इससे ज्यादा शांति और सौहार्द के माहौल की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर फांसी दिए जाने से राज्य की शांति भंग होती है तो यह गलत होगा।
उन्होंने कहा कि राज्य के लोग इस मुद्दे पर बेहद भावुक हैं। फिर भुल्लर का स्वास्थ्य भी ठीक नहीं है। ऐसे व्यक्ति को फांसी पर चढ़ाकर कुछ हासिल नहीं होने वाला है। अगर केंद्र या राज्य सरकार की ओर से इस मुद्दे पर छोटी सी गलती भी की जाती है तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
वहीं आतंकवाद के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करने की बात कहने वाली भाजपा के अध्यक्ष राजनाथ सिंह से भी दोनों नेता मिले। लेकिन उन्हें क्या आश्वासन दिया गया है, इसका खुलासा अब तक भाजपा ने नहीं किया है।
दूसरी ओर कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने साफ किया है कि प्रधानमंत्री इस मामले पर जो मर्जी निर्णय ले सकते हैं लेकिन पार्टी का रुख साफ है कि कानूनी प्रक्रिया के मामलों में उसकी ओर से किसी तरह की दखलंदाजी नहीं की जाएगी।