देश के स्वास्थ्य क्षेत्र के ढांचे को लेकर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने शुक्रवार को गहरी चिंता जताई। उन्होंने यहां कहा कि भारत में जन स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है।
रमेश के अनुसार यहां तक कि बांग्लादेश और केन्या जैसे गरीब देशों का स्वास्थ्य सूचकांक भी भारत से बेहतर है। स्वास्थ्य क्षेत्र का मूल्यांकन करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस क्षेत्र पर होने वाले खर्च का 70 प्रतिशत निजी संसाधनों से आता है।
यह बात भारत को एक अद्वितीय देश बनाती है। रमेश के अनुसार एकमात्र यही महत्वपूर्ण वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग कर्ज के बोझ के तले दबे रहते हैं। उन्होंने साथ ही कहा कि भारत के कई हिस्सों में जन स्वास्थ्य प्रणाली सीधे तौर पर अस्तित्व में ही नहीं है।
जयराम ने कहा कि दुनिया के कई देशों में स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ते निजी खर्च के मुद्दे पर बहस हो रही है। सोशल इंडेक्स को बेहतर बनाने के लिए रमेश ने राज्यों की भूमिका को भी अहम बताया।
उन्होंने कम शिशु मृत्यु दर और शौचालयों की बेहतर सुविधा वाले बांग्लादेश और केन्या जैसे देशों की सफलता में महिला सशक्तिकरण को एक महत्वपूर्ण वजह करार दिया।
साथ ही जोर देकर कहा कि स्वास्थ्य का मुद्दा उनकी प्राथमिकता पर बना रहेगा। उन्होंने राज्यों से कहा कि वे गरीबी उन्मूलन के प्रयासों में अपनी भूमिका से पीछे नहीं हट सकते। रमेश के अनुसार पर्यावरण के गिरते स्तर ने भी गरीबी को बढ़ाने में भूमिका निभाई है।