अमेरिकी ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) जैसी अपनी व्यवस्था विकसित करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए भारत ने बुधवार को पांचवें नेविगेशन सेटेलाइट आईआरएनएसएस-1ई का सफल प्रक्षेपण किया।
रॉकेट लांचर पीएसएलवी-सी31 ने इस उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया। इसरो की योजना मार्च तक इस सीरीज के सभी सातों उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की है।
चेन्नई से करीब 110 किमी दूर स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 9.31 बजे पीएसएलवी-सी31 रॉकेट में विस्फोट हुआ और 19:20 मिनट बाद सेटेलाइट पृथ्वी की कक्षा में स्थापित हो गया।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की इस सफलता पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों को बधाई दी है। पीएम ने इसरो के वैज्ञानिकों से फोन पर बात की और कहा कि वे लगातार हमें गर्व महसूस करवा रहे हैं।
उपग्रह को जियो सिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में जैसे ही पहुंचाया जाएगा, आईआरएनएसएस-1ई के दो सोलर पैनल स्वत: सक्रिय हो जाएंगे।
इस सेटेलाइट की कक्षा बढ़ाने का काम कर्नाटक के हासन में स्थित मास्टर कंट्रोल रूम से किया जाएगा। इससे पहले अंतरिक्ष में छोड़े गए इस सीरीज के चार उपग्रह आईआरएनएसएस सिस्टम को शुरू करने के लिए पर्याप्त हैं, लेकिन इस पांचवें सेटेलाइट के अलावा छोड़े जाने वाले दो अन्य सेटेलाइटों से यह सिस्टम ज्यादा सटीक और सक्षम हो सकेगा।