अलग तेलंगाना राज्य के गठन की घोषणा होते ही आंध्र प्रदेश कांग्रेस में बगावत के सुर तेज हो गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार के इस फैसले के विरोध में कांग्रेस के चार मंत्री जल्द ही अपने इस्तीफे मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी को सौंपने वाले हैं।
वहीं छह कांग्रेसी विधायक भी पार्टी छोड़ने के मूड में हैं। ये लोग अखंड आंध्र प्रदेश की वकालत कर रहे हैं। हालांकि पीटीआई के मुताबिक इन मंत्रियों ने अभी अपने इस्तीफे नहीं दिए हैं।
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टीजी वेंकटेश, इरासु प्रताप रेड्डी, जी श्रीनिवास और अन्य मंत्रियों का कहना है, 'हमारी किरण कुमार रेड्डी से तेलंगाना मसले पर बातचीत हुई है। अभी कुछ नहीं हुआ है। कांग्रेस ने केवल तेलंगाना गठन की घोषणा की है। हमें उम्मीद है कि तेलंगाना गठन की प्रक्रिया पूरी नहीं होगी।'
मुख्यमंत्री को 'चिट्ठी' सौंपी
अपने इस्तीफे पर इन मंत्रियों ने कहा कि हम लोगों ने इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन एक 'चिट्ठी' जरूर सीएम को दी है।
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एक अन्य मंत्री डोक्का मनिकया वाराप्रसाद का कहना है कि इस्तीफा इस मसला का हल नहीं है।
कई इलाकों में बंद
इधर तेलंगाना गठन के फैसले के खिलाफ रायलसीमा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में बंद का आयोजन किया गया। बंद का आयोजन आंध्र प्रदेश के समर्थकों ने किया।
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बंद का सबसे ज्यादा असर स्कूल-कॉलेज और परिवहन व्यवस्था पर देखने को मिला। हालांकि बंद के दौरान किसी हिंसा की कोई खबर नहीं है।
'कोई नया राज्य नहीं बनेगा'
इधर आंध्र प्रदेश को विभाजित कर पृथक तेलंगाना राज्य बनाने के सरकार के पक्ष का पुरजोर समर्थन करते हुए वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि यह मामला अलग है और इसके अलावा देश में कोई दूसरा राज्य नहीं बनेगा।
चिदंबरम ने कहा कि तेलंगना को मामला 55 साल पुराना है। पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय से यह मामला चला आ रहा था।
आंध्र प्रदेश और हैदराबाद को मिलाकर राज्य बनाए जाने के बाद से लेकर इस विवाद को दूर करने के लिए कई तरह के उपाय किए गए लेकिन पृथक राज्य के अलावा कोई सही विकल्प नहीं है।