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पहले भी सदन में चले हैं जूते, हाथापाई भी

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भारतीय लोकतंत्र की गंगोत्री संसद में आज जो भी कुछ हुआ, इससे निश्चय ही संविधान की मूल आत्मा कटोचती होगी।
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संसद में कुछ माननीयों ने अपनी मांग शालीनता से रखने की वजह लात घूंसे चलाए, जहरीला स्प्रे छिड़का, चाकू निकाले और धक्कामुक्की भी की। यहां तक इन सांसदों ने सारी मर्यादा को ताक पर रखकर मारपीट भी की।

यह सब कुछ तब हुआ, जब लोकसभा में तेलंगाना बिल पेश होना था। सदन में ये सब अचानक ऐसे हुआ कि सबकी आंखें फटी रह गई।

लेकिन दुख की बात है कि पहले भी संसद में सांसदों की ऐसी करतूतें सामने आती रहीं, लेकिन कुछ नहीं बदला।

उखाड़ दिए थे सभापति के मेज के माइक

23 मार्च, 2013: राज्यसभा में बजट सत्र के दौरान श्रीलंकाई तमिलों के मुद्दे पर हो रहे हंगामे के दौरान नाराज एक सांसद ने अध्यक्ष के आसन के माइक उखाड़ दिए, वहीं लोकसभा में तेलंगाना मुद्दे पर दिन भर हंगामा होता रहा।

5 सितंबर, 2012: सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति और जनजाति को प्रमोशन में आरक्षण देने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पेश करने के दौरान राज्यसभा में हाथापाई, बसपा सांसद अवतार सिंह करीमपुरी और सपा सांसद नरेश अग्रवाल के बीच धक्का-मुक्की हुई। हंगामे की वजह से विधेयक पर चर्चा तक नहीं हो पाई।

8 मार्च, 2010: राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक के विरोध में सपा, राजद और लोजपा के कुछ सदस्यों ने विधेयक की प्रतियां सभापति के आसन की ओर उछाल दीं, मेज पर चढ़ गए, धक्कामुक्की में सभापति की मेज के दो माइक भी उखाड़ दिए गए।

19 मार्च, 2007: राज्यसभा में भाजपा के एसएस अहलूवालिया ने भाषण दे रहे तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के सामने आकर अवरोध पैदा करने की कोशिश की जिसके बाद सांसदों के बीच धक्का-मुक्की हुई।
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कुर्सी फेंके, गमले भी तोड़े

जुलाई, 2010: बिहार विधानसभा में पक्ष और विपक्षी सदस्यों ने एक-दूसरे पर कुर्सी फेंके, गमले भी तोड़े गए।

फरवरी, 2009: आंध्र प्रदेश में विपक्षी दल के हंगामा के दौरान विधायक एक-दूसरे के ऊपर गिरे, जिसमें कुछ जख्मी भी हो गए।

फरवरी, 2008: यूपी विधानसभा में सपा सदस्यों ने राज्यपाल की मौजूदगी में काले गुब्बारे उड़ाए।

नवंबर, 2006: पश्चिम बंगाल विधानसभा में पक्ष-विपक्ष के सदस्यों के बीच हाथापाई, नौ विधायक समेत 13 लोग घायल।

दिसंबर, 2005: बिहार विधानसभा में विपक्षी दल के सदस्यों ने सदन में तोडफ़ोड़ की, सभा सचिव की ओर कुर्सियां फेंकी।

नवंबर, 2004: उड़ीसा में पक्ष-विपक्ष के बीच हाथापाई और चप्पल तक फेंका गया, मुख्यमंत्री नवीन पटनायक घायल हुए।

मार्च, 2001: गुजरात में हंगामा के दौरान विपक्षी विधायकों ने अध्यक्ष के कमरे की खिड़की तोड़ डाले और नेम प्लेट भी फेक दिए।

अक्तूबर, 1997: यूपी में कल्याण सिंह सरकार के विश्वास मत के दौरान एक दूसरे पर माइक, जूते चलाए, कई विधायक घायल हुए।
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