सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों की सुरक्षा संबंधी दिशा निर्देश तैयार करने में नाकाम रहने पर महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करते हुए बांबे हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि वह ऐसे लोगों की सुरक्षा के लिए जल्द कदम उठाए जिन्हें उनके सामाजिक कार्यों के लिए धमकियां मिल रहीं हैं।
पुणे के आरटीआई कार्यकर्ता सतीश शेट्टी की हत्या के बाद कोर्ट के स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश डी डी सिन्हा और जस्टिस के के टाटेड की बेंच ने सरकार को तुरंत सुरक्षा संबंधी दिशा निर्देश तैयार करने को कहा है। मई, 2010 में हाईकोर्ट की एक अन्य बेंच ने इस मामले में दिशा निर्देश बनाने के लिए सरकार को एक कमेटी के गठन का निर्देश दिया था।
सोमवार को अतिरिक्त सरकारी वकील नितिन देशपांडे ने कोर्ट को बताया कि सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा संबंधी प्रस्तावों की जांच-परख के लिए विशेष कमेटी का गठन कर दिया गया है। इस पर कोर्ट ने संज्ञान में लिया कि राज्य सरकार ने दिशा निर्देशों और उन्हें तय करने की समय सीमा पर चुप्पी साध रखी है। इस पर कोर्ट ने आदेश दिया कि राज्य सरकार चार हफ्तों के भीतर एफीडेविट देकर यह बताए कि जरूरी दिशा निर्देश कब तक तैयार कर लिए जाएंगे।