भ्रष्ट जज के प्रमोशन को लेकर पूर्व सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू के खुलासे के बाद राजनीति में भूचाल आ गया है।
यूपीए की पिछली सरकार और डीएमके दूसरे राजनीतिक दलों के निशाने पर आ गई है। इस खुलासे के चलते राज्यसभा और लोकसभा दोनों में एआईएडीएमके के सांसदों ने जांच की मांग कहकर हंगामा खड़ा कर दिया।
जानिए आखिर जिस भ्रष्ट जज को लेकर ये पूरा विवाद खड़ा हुआ है वो कौन है?
कौन हैं एस अशोक कुमार
काटजू ने यूपीए सरकार पर सवाल खड़ा करते हुए जिस जज पर आरोप लगाए थे उसके नाम का खुलासा तो नहीं किया।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने उस जज के नाम का खुलासा कर दिया। भूषण के मुताबिक वह जज दिवंगत सैनटिआगो अशोक कुमार थे।
दरअसल 30 जून 2001 में डीएमके चीफ करुणानिधि को तमिलनाडु पुलिस ने आधी रात को फ्लाइओवर घोटाले के आरोप में बड़े कठोर ढंग से गिरफ्तार किया था।
इसी मामले में करुणानिधि को जज अशोक कुमार ने ही जमानत दी थी और पुलिस को फटकारते हुए कहा था कि आपका दिमाग मांसपेशियों का बना है या मिट्टी का।
अशोक कुमार ने पुलिस से पूछा था कि आप पर ऐसा क्या दबाव था कि 78 वर्षीय बीमार व्यक्ति को इस तरह से गिरफ्तार किया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद जज अशोक कुमार डीएमके के नजदीक आ गए।
2003 में एडिशनल जज बनाए गए थे
अशोक कुमार को 2003 में एनडीए की सरकार के दौरान मद्रास हाईकोर्ट में एडिशनल जज के तौर पर नियुक्ति मिली। इस दौरान केंद्र की एनडीए सरकार को डीएमके का समर्थन प्राप्त था।
इसके बाद जब यूपीए सरकार सत्ता में आई तो अशोक कुमार को पूर्ण रूप से जज बनाकर 2008 में आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। जुलाई 2009 में कुमार सेवानिवृत्त हो गए और उसी साल उनकी मौत हो गई।
अशोक कुमार ने अपने वकालत के शुरुआती दिनों में दो बार जनता पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन 1977 और 1980 दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
जस्टिस बालाकृष्णन ने आरोपों को नकारा
हालांकि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस केजी बालाकृष्णन ने काटजू के आरोपों नकार दिया है।
बालाकृष्णन ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया कि उन्हें मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की ओर से अशोक कुमार के बारे में सही रिपोर्ट्स मिली थी। इसी के आधार पर उन्होंने कार्यकाल बढ़ाने का फैसला लिया।
बालाकृष्णन से जब अशोक कुमार के भ्रष्टाचार के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें मद्रास हाईकोर्ट के जज की ओर से ऐसी कोई भ्रष्टाचार की जानकारी नहीं मिली।
बालाकृष्णन ने बताया कि उन्हें मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने सिर्फ इतना बताया कि उनके डीएमके के नेताओं से नजदीकी संबंध है।