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मोदी के खिलाफ लड़ने पर प्रियंका का बड़ा खुलासा!

Mon, 14 Apr 2014 12:23 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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फर्ज कीजिए कि बनारस लोकसभी सीट पर भाजपा की तरफ से नरेंद्र मोदी और कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी मैदान में उतरतीं। यह सुपरहिट मुकाबला होता। सभी चुनावी लड़ाइयों से बड़ी सियासी जंग। ऐसी लड़ाई, जिसकी आड़ में बाकी सभी नेता छिप जाते।
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मोदी बनाम प्रियंका की लड़ाई देश में अजीब सा करंट पैदा करती और दुनिया की निगाह खींचती। लेकिन ऐसा हो न सका। खबर आई है कि प्रियंका गांधी बनारस से मोदी के खिलाफ उतरना चाहती थीं, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया।

हालांकि, जैसे ही यह खबर सामने आई प्रियंका को सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के खिलाफ लड़ने का उनका इरादा कभी नहीं था। हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि राहुल गांधी ने उनसे कहा था कि अगर वो चुनाव लड़ना चाहती हैं, तो गांधी परिवार मजबूती से उनके साथ खड़ा रहेगा।
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भाई ने कहा लड़ना चाहती हो तो लड़ोः प्रियंका

प्रियंका गांधी ने कहा, "मेरे परिवार का कोई भी सदस्य मुझे कभी भी चुनाव लड़ने से नहीं रोकेगा। अगर मैं चुनाव लड़ना चाहती, तो मेरे भाई, मां और पति दिल खोलकर मेरा साथ देते।"

उन्होंने कहा, "मेरे भाई मुझसे कई बार कह चुके हैं कि उनके मुताबिक मुझे चुनाव लड़ना चाहिए।" उन्होंने साफ कर दिया कि वह उत्तर प्रदेश के रायबरेली और अमेठी में ‌अपनी मां सोनिया गांधी और भाई राहुल गांधी के चुनाव प्रचार अभियान का जिम्मा संभाले रहेंगी।

प्रियंका ने कहा, "चुनाव न लड़ने का मेरा फैसला व्यक्तिगत हैं। मैं यह फैसला केवल तभी बदलूंगी, जब भीतर से महसूस करूंगी।" जाहिर है, चुनावों के वक्त आई इस खबर ने अचानक सियासी उबाल बढ़ा दिया है।

मोदी के खिलाफ लड़ना चाहती थीं प्रियंका?

एक अंग्रेजी अखबार का दावा है कि हाल तक अपनी राजनीति जिम्मेदारियों को अमेठी और रायबरेली तक सीमित रखने वालीं प्रियंका गांधी ने मोदी के खिलाफ लड़ने की आवाज उठाई थी, क्योंकि उनका मानना था कि वो देश के लिए खराब हैं और उन्हें रोका जाना चाहिए।

बनारस में अगर प्रियंका, मोदी के खिलाफ उतरतीं, तो न केवल गुजरात के मुख्यमंत्री को अपना राष्ट्रीय प्रचार अभियान सीमित रखना पड़ता, बल्कि ‌उनकी एंट्री से कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का जोश और मनोबल, दोनों बढ़ते।

दरअसल, फिलहाल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का मनोबल ‌टूटा हुआ है और उसके कई मंत्री चुनाव हारने के डर से मैदान में नहीं उतर रहे हैं। अगर प्रियंका हार के डर के बजाय वाकई मुकाबला करने का हौसला दिखातीं, तो कार्यकर्ताओं और कांग्रेस के काडर में मजबूत संदेश गया होता।

कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ता?

कांग्रेस के नेता ने कहा, "अगर वो चुनाव हारतीं, तो भी नतीजा चुनावों के बाद ही सामने आता। लेकिन इससे पहले गजब का उत्साह मिलता। यह उनकी तरफ से हिम्मत दिखाने वाला कदम होता। लेकिन चुनाव लड़ने से भागने वाले वरिष्ठ कांग्रेसी नेता यह बात नहीं समझ सकते।"

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि प्रियंका को इस‌लिए रोका गया, क्योंकि अजय राय बनाम मोदी की लड़ाई को स्थानीय बनाम बाहरी के रूप में पेश किया जा सकता है। लेकिन इसकी और भी वजह हैं।

अनुमान है कि बनारस में प्रियंका की मौजूदगी, मोदी को जरूरत से ज्यादा अहमियत देने जैसी होगी। इसके अलावा गांधी परिवार के तीन अहम नेताओं की हार के डर ने भी कुछ डराया।
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रॉबर्ट वाड्रा के जरिए होता हमला

इसके अलावा अगर प्रियंका गांधी, मोदी के हमलों की जद में आतीं, तो उनके पति रॉबर्ट वाड्रा के रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ के साथ कथित रिश्तों पर सवाल उठते और दूसरे जमीनी सौदों पर भी निगाह जाती।

सबसे बड़ी बात यह है कि ऐसा होने पर राहुल गांधी और उनके प्रचार अभियान से ध्यान हटकर प्रियंका की तरफ चला जाता और उनकी एंट्री से विरोधियों को यह कहने का मौका मिलता कि राहुल गांधी में दम नहीं था, इसलिए ऐसा हुआ।

प्रियंका खुद को राहुल के विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि बनारस में बढ़िया चुनौती के रूप में खुद को पेश करना चाहती थी। उन्होंने कहा, "वो कांग्रेस की अगुवाई करने की महत्वाकांक्षा नहीं रखतीं।"
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