देश में एक साल पहले तक बहने वाली सियासत की हवा का रुख पूरी तरह बदल चुका है। जनता देश में हुए इस परिवर्तन को उम्मीद की नजरों से देख रही है।
कल तक भुज के लालन कॉलेज से देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ललकारने वाले नरेंद्र मोदी ने आज खुद लाल किले के प्राचीर से देश की जनता को संबोधित किया।
याद कीजिए एक साल पहले लोकसभा चुनावों को लेकर चल रहे महासंग्राम के बीच गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनमोहन सिंह को सीधे तौर पर चुनौती दे डाली थी।
विकास और गुड गवर्नेंस के नाम पर मनमोहन सिंह की आलोचना करने वाले नरेंद्र मोदी के सामने भी वही चुनौतियां मुंह बाये खड़ी हैं।
जमकर हुई थी मोदी की आलोचना
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री को सीधी चुनौती देने पर मोदी की जमकर आलोचना हुई थी। आजादी के बाद भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में ये पहली बार ऐसा मौका था जब किसी प्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री पर इस तरह से सीधे हमला बोला हो।
विपक्षी दलों ने इसे नरेंद्र मोदी का अंहकार बताया था। विरोधियों ने तो यहां तक कह दिया कि मोदी जिंदगी भर नकली लाल किले पर तिरंगा फहराते रहे जाएंगे।
मोदी की चुनौती ने देश में एक नई बहस शुरू कर दी थी कि क्या एक मुख्यमंत्री का इस तरह से प्रधानमंत्री को चुनौती देना लोकतंत्र में ठीक परंपरा है?
पाकिस्तान आज भी है सिरदर्दी
मोदी ने इस लालन कॉलेज वाले भाषण में मनमोहन सिंह और यूपीए सरकार पर पाकिस्तान के प्रति नर्म रवैये रखने का आरोप लगाया था। आज भी वही पाकिस्तान, देश के लिए उतनी ही बड़ी चुनौती बना हुआ है।
हालांकि स्वतंत्रता दिवस से कुछ दिन पहले ही सियाचीन के दौरे पर गए प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान पर प्रॉक्सी वॉर का आरोप लगाते हुए कड़ा संदेश दिया।
मोदी ने सेना के जवानों को संबोधित करते हुए कहा था कि पड़ोसी मुल्क में सीधे तौर पर लड़ने की हिम्मत नहीं है।
लेकिन ये आकंड़ा भी उतना ही सच है कि पिछली सरकार की तुलना में मोदी सरकार के आने के बाद पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ और सीजफायर का उल्लंघन की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
अब जब देश में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और जिस सख्त रवैये के साथ आंख से आंख मिलाने की बातें मोदी अपने भाषण में किया करते थे उसकी अग्निपरीक्षा है। हालांकि मोदी ने पाक पीएम नवाज शरीफ के साथ शॉल-साड़ी उपहार के कदम से सबको चौंका जरूर दिया।
मोदी और मनमोहन के भाषण की तुलना
बीते साल मोदी ने मनमोहन सिंह के भाषण को पूरी तरह खारिज करते हुए उसे निराश करने वाला भाषण बताया था। मोदी का कहना था कि मनमोहन का भाषण देश की जनता को आशा की उम्मीद नहीं जगा पाया।
मोदी का मनमोहन पर आरोप था कि 60 साल में कुछ नहीं बदला। आपका भाषण वैसा ही था जैसे जवाहर लाल नेहरू ने दिया था। देश की उन्हीं समस्याओं का जिक्र किया गया जिनका नेहरू ने किया था।
ऐसे आरोपों के बाद नरेंद्र मोदी के भाषण को लेकर लोगों की उम्मीद और भी ज्यादा बढ़ जाती है। अब देखना होगा कि मोदी खुद लाल किले के प्राचीर से क्या घोषणाएं करते हैं या अगले पांच के लिए देश की क्या दिशा तय करते हैं।
इनसे कैसे निपटेंगे मोदी जी
विदेशों के बैंकों में जमा भारतीयों के एक लाख 40 हजार करोड़ अमेरिकी डॉलर से भी ज्यादा काला धन आज भी देश की सबसे बड़ी समस्या है। 177 देशों के सर्वे में भ्रष्टाचार के मामले में जहां चीन 80वें पायदान पर है, वहीं हम 94वें स्थान पर हैं।
आजादी के 60 साल बाद भी देश में करीब 27 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं। देश की 22 फीसदी आबादी अभी भी गरीबी रेखा के नीचे गुजर-बसर करने को मजबूर है। जबकि चीन में 2010 में यह संख्या घटकर 11.6 फीसदी पहुंच गई।
महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अत्याचार के मामले भी एक अदद चिंता का विषय बना हुआ है। साल 2013 में महिलाओं के प्रति अपराध में दोगुने से भी ज्यादा बढ़ोतरी हुई है।
साल 2013 में महिलाओं के अपराध के 3,09,546 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2012 में यह संख्या 2,44,270 थी। अकेले रेप की घटनाओं में ही 35 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई।