संसद सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रियों को सुशासन और विकास का मंत्र दिया। उन्होंने मंत्रियों ने सौ दिन का ऐजेंडा तैयार करने के साथ ही पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ काम करने की नसीहत दी।
मंत्रिमंडल की इस बैठक में प्रधानमंत्री का लगभग पूरा जोर सुशासन और विकास पर रहा। उन्होंने मंत्रियों से अपने कार्यालयों में अच्छे व ईमानदार लोग रखने तथा काम केजानकारों को तबज्जो देने को कहा।
मंत्रियों से कहा गया कि वे अपने रिश्तेदारों को भी अपने निजी स्टाफ में न रखें।
तेजी से काम के आदेश
इस बैठक में कैबिनेट मंत्रियों के साथ राज्यमंत्री भी मौजूद थे। दरअसल बुधवार से शुरू हो रहे संसद के इसी सत्र में राष्ट्रपति को दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करना है। राष्ट्रपति के संबोधन को कैबिनेट की मंजूरी देती है।
इसलिए माना जा रहा है कि राष्ट्रपति के संबोधन में मोदी अपनी सरकार का वही ऐजेंडा शामिल करना चाहते हैं जिस पर तय समय में अमल भी हो सके।
क्योंकि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने पांच साल पहले सत्ता में आने पर राष्ट्रपति के संबोधन में 100 दिन में महंगाई कम करने का वादा तो कर दिया, लेकिन उसे पूरा नहीं कर पाई।
इसके बाद वह इस वादे को लेकर हमेशा ही विपक्ष के निशाने पर रही। इसलिए मोदी सरकार ऐसा ऐजेंडा पेश करेंगे, जिस पर बाद में उंगली न उठे।
बहरहाल, मंत्रिपरिषद की इस तीसरी बैठक के लिए मोदी ने मंत्रियों से उनके मंत्रालयों के 100 दिन के कामकाज का एजेंडा पर भी चर्चा हुई।
पहले भी दिए 10 सूत्रीय ऐजेंडा
मोदी ने कुशल प्रशासन और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन पर जोर दिया। मोदी अपना 10 सूत्री एजेंडा पहले ही जारी कर चुके हैं। इस एजेंडा में निवेश बढ़ाने, बुनियादी ढांचा से जुड़ी परियोजनाओं को समय सीमा पर पूरा करने और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन शामिल है।
मोदी ने कुछ दिन पहले ही मंत्रियों को अगले 100 दिन का एजेंडा तय करने का निर्देश दिया था। प्रधानमंत्री ने बीते शनिवार को उन अधिकार प्राप्त मंत्रिसमूहों (ईजीओएम) और मंत्री समूहों को समाप्त कर दिया था जिन्हें यूपीए सरकार ने गठित किया था।