यह सच है कि अरुणाचल प्रदेश में संवैधानिक संकट था क्योंकि बीते छह महीनों से विधानसभा की बैठक नहीं हुई थी। वहां कोई सरकार नहीं थी। पर महत्वपूर्ण सवाल तो यह है कि आख़िर यह संवैधानिक संकट क्यों और कैसे खड़ा हुआ।
एक बात बिल्कुल साफ है कि यह संकट अपने आप पैदा नहीं हुआ। यह संकट पैदा किया गया। एक पार्टी की बहुमत की सरकार थी। 60 सदस्यों की विधानसभा में उसके 47 सदस्य थे। सरकार चल रही थी। यकायक विधायकों ने पाला बदल लिया, पार्टी छोड़ दी।
यह यूं ही नहीं होता। इसे जानबूझकर, जोड़-तोड़कर किया गया। एक संकट खड़ा किया गया। इसके दूरगामी असर होंगे। अरुणाचल प्रदेश पूर्वोत्तर का सबसे शांत राज्य रहा है। यह उस इलाके का अकेला राज्य है, जहां कोई संकट कभी नहीं हुआ।