राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राज्यपालों के अपील की है कि वे संविधान की गरिमा को बनाए रखें। राज्यपालों के दो दिवसीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश ने आजादी के बाद लगातार मजबूती हासिल की है। यह मुख्य रूप से संविधान के अनुपालन की दृढ़ता के कारण संभव हो सका है।
यह एक चिर स्थाई दस्तावेज है जो हमारी आशाओं और उसकी सफलता की विस्तृत रुपरेखा प्रदर्शित करता है। राष्ट्रपति की टिप्पणी को अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू करने के क्रम में राज्यपाल की भूमिका पर सवाल से जोड़कर देखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पिछले साल में देश के सामने कई चुनौतियां थीं। सीमावर्ती राज्य आतंकी हमले के शिकार हुए। आंतरिक सुरक्षा के चुनौतीपूर्ण माहौल ने हमें रक्षा क्षमताओं को उन्नत करने के लिए प्रेरित किया है। हमें अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को शांतिपूर्ण बातचीत और विचार विमर्श के साथ सुलझाने का प्रयास जारी रखना होगा।
'युद्धस्तर पर समाधान पर जोर दिया'
राष्ट्रपति ने किसानों की समस्याओं का युद्धस्तर पर समाधान पर जोर दिया है। उन्होंने मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, समार्ट सिटी और स्वच्छ भारत मिशन को राज्य सरकारों की भागीदारी से पूरा करने पर बल दिया।
उन्होंने विश्वविद्यालयों में गुणवत्ता सुधार में राज्यपालों की भूमिका को भी रेखांकित किया। सम्मेलन में सुरक्षा, आतंकवाद, युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास, उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं पर चर्चा हो रही है। उत्तराखंड के राज्यपाल के के पाल ने बार्डर क्षेत्र विकास योजनाओं के लिए और फंड की जरुरत पर जोर दिया है।
राज्यपालों के सम्मेलन को संबधित करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने चुनौतियों के बावजूद फिछले दशक में प्रति व्यक्ति आय में पांच गुना बढ़ोतरी हासिल की है। उत्तराखंड नेपाल और चीन की सीमा पर स्थित है।
बार्डर के विकास को उच्च प्राथमिकता दिए जाने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि अर्द्ध कुंभ के दौरान हरिद्वार में गंगा की पवित्रता और सफाई का विशेष ध्यान रखा गया। उन्होंने राज्य को ग्रीन बोनस दिए जाने पर बल दिया।