रेल मंत्रालय की ओर से भीड़-भाड़ वाले रूटों पर स्पेशल प्रीमियम ट्रेनों को दौड़ा तो दिया गया, लेकिन भारी-भरकम किराया होने की
वजह से ये ट्रेनें मुसाफिरों को रिझा नहीं पा रही हैं।
रेल मंत्रालय भी यह सोचने पर मजबूर हो गया है कि आखिर इन ट्रेनों को किस तरह मुसाफिरों की उम्मीदों पर खरा उतारा जाए। हालत यह है कि बीते वर्ष देशभर में 284 रूटों पर 1600 प्रीमियम ट्रेनों को चलाया गया, लेकिन इनमें आठ सौ ट्रेनें ही ऐसी रहीं, जो 60 प्रतिशत यात्री जुटा पाईं। बाकी 50 प्रतिशत ट्रेनों का तो इससे भी बुरा हाल रहा।
गर्मी का सीजन अपने उफान पर है और भीड़-भाड़ वाले रूटों पर डिमांड भी काफी अधिक है। बावजूद इसके रेल मंत्रालय सिर्फ आठ प्रीमियम ट्रेनें चलाने पर मजबूर है। सूत्रों की मानें तो मंत्रालय के पास दिल्ली-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई व कुछ अन्य रूटों पर हद से ज्यादा डिमांड है। बावजूद इसके प्रीमियम ट्रेनों की ओर ज्यादा लोग रुख नहीं कर रहे हैं। मंत्रालय में यही माथापच्ची चल रही है कि इन ट्रेनों में मुसाफिरों को किस तरह आकर्षित किया जाए।