कश्मीर में सेना की तैनाती के लिए जनमत सर्वेक्षण की सलाह देकर प्रशांत भूषण ने आम आदमी पार्टी (आप) की मुश्किलें बढ़ा दी है। इस विवादित सलाह के कारण आप को चौतरफा हमले का शिकार होना पड़ रहा है।
भाजपा ने जहां आप के नेता पर अलगाववादियों और पाकिस्तान की भाषा बोलने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला है। वहीं कांग्रेस ने भी प्रशांत भूषण को राष्ट्रीय हित से जुड़े मुद्दों पर सोच समझ कर बोलने की नसीहत दी।
भाजपा ने इस मुद्दे आप के साथ साथ कांग्रेस को भी घेरने की रणनीति के तहत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर देश को विश्वास में लिए बिना पाकिस्तान से समझौते की राह पर आगे बढ़ने का भी आरोप लगाया है।
भूषण ने रविवार को कहा था कि घाटी में सेना तैनात करने या न करने का फैसला जनता की स्वीकृति लेने के बाद करना चाहिए।
इससे पहले भी भूषण ने वर्ष 2011 में जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह कराने की मांग करते हुए विवाद खड़ा कर दिया था।
भूषण के बयान पर भाजपा नेता अरुण जेटली ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को जनमत संग्रह से तय नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कश्मीर में आतंक का ढांचा बरकरार रहने का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे विषयों पर केवल सुरक्षा को ध्यान में रख कर ही विचार किया जाता है।
वहीं पार्टी प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने इस मामले में आप और कांग्रेस में मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ खुद प्रधानमंत्री कश्मीर पर देश को विश्वास में लिए बिना पाकिस्तान से समझौता कर रहे थे तो दूसरी ओर आप वहां जनमत संग्रह की मांग कर रही है।
वहीं, केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने भूषण की सलाह की आलोचना करते हुए कहा कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा को किनारे कर आप के नेताओं को राष्ट्रीय हित से जुड़े मुद्दों की संवेदनशीलता समझने की जरूरत है।