माकपा को ममता बनर्जी और उनके मंत्रियों के साथ बदसलूकी और धक्का मुक्की मामले में राज्यपाल एमके नारायणन की बयानबाजी बेहद नागवार गुजरी है।
पार्टी महासचिव प्रकाश करात ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिख कर इस बयानबाजी को राजनीतिक हस्तक्षेप बताते हुए राज्यपाल को राजनीति न करने की सलाह देने की मांग की है।
पत्र में करात ने आरोप लगाया है कि नारायणन की बयानबाजी ने इस घटना के बाद वाम दलों के खिलाफ हिंसा पर उतारू तत्वों को बढ़ावा दिया है।
राज्यपाल ने बीते बुधवार को इस घटना को लोकतंत्र पर धब्बा करार देते हुए इसे सुनियोजित हमला करार दिया था और माकपा पोलित ब्यूरो से माफी मांगने की मांग की थी।
राष्ट्रपति को लिखे पत्र में बदसलूकी की घटना का जिक्र करते हुए कहा है कि इसकी माकपा ने भी निंदा की थी। मगर राज्यपाल इस घटना की निंदा तक ही सीमित नहीं रहे।
उन्होंने इसे माकपा का सुनियोजित हमला करार देते हुए पोलित ब्यूरो से माफी मांगने की मांग कर डाली।
पत्र में कहा गया है कि कोलकाता में बैठे राज्यपाल इस निष्कर्ष पर कैसे पहुंच गए कि हमला सुनियोजित था।
जाहिर है कि राज्यपाल ने अपने पद और मर्यादा की सीमा रेखा पार कर गए। करात ने आरोप लगाया कि नारायणन की सार्वजनिक और मर्यादाहीन बयानबाजी के कारण पश्चिम बंगाल में वाम दलों के खिलाफ हमले में तेजी आई।
पत्र के साथ करात ने राज्यपाल के बयान की प्रति भी राष्ट्रपति को भेजी है। बयान का अध्ययन करने का अनुरोध करते हुए पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रपति स्वयं इसका निर्णय लें कि राज्यपाल का राजनीतिक हस्तक्षेप सही है या नहीं।
इसके साथ ही यह उम्मीद जताई गई है कि राष्ट्रपति राज्यपाल को बयानबाजी के संदर्भ में उचित सलाह देंगे।