अगर आप बिजली संकट से परेशान हैं और आपको लग रहा है कि इससे जल्द निजात मिलने वाली है तो इसकी संभावना कम ही नजर आ रही है। ये हम नहीं कह रहे ऐसा ऊर्जा मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़े बता रहे हैं।
बात अगर राजधानी दिल्ली की करें तो यहां की जनता पहले ही बिजली कटौती से परेशान है। इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार भी लगातार कोशिशों ने जुटा हुआ है। उन्होंने अगले कुछ दिनों में दिल्ली से बिजली संकट दूर करने की बात भी कही है। लेकिन ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक आने वाले वक्त में उत्तर भारत में बिजली का संकट और बढ़ने की संभावना है।
कई पावर प्लांट में कोयले की कमी
एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक इसके पीछे अहम वजह देश भर के पावर प्लांट से होने वाले बिजली उत्पादन की कमी को बताया जा रहा है। दरअसल देश के कई पावर प्लांट में कोयले की कमी हो गई है।
जिसका असर बिजली उत्पादन पर पड़ने की संभावना है। यानी भीषण गरमी झेल रहे लोगों को बिजली कटौती से जल्द कोई निजात मिलेगी ये कहना जल्दबाजी होगा।
ऊर्जा मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 21 पावर प्लांट में चार दिनों से भी कम का कोयला बचा है। वहीं दूसरे 15 पावर प्लांट के पास भी 7 दिन से कम का कोयला है।
बिजली सप्लाई पर पड़ेगा असर
आमतौर पर ये पावर प्लांट करीब 55,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन करते हैं, जो देश के कुल ऊर्जा उत्पादन का 20 फीसदी है।
इन पावर प्लांट में से 6 एनटीपीसी के हैं जो दिल्ली समेत उत्तर भारत को बिजली सप्लाई करते हैं। इन पावर प्लांट के पास कोयला बचा ही नहीं है।
ऐसे में अधिकारी लगातार हालात पर नजर रख रहे हैं। उनकी कोशिश यही है कि उत्तरी ग्रिड से यूपी और हरियाणा को हो रही बिजली सप्लाई पर असर कम से कम पड़े।
उत्तरी ग्रिड पर बढ़ा दबाव
वहीं दबाव बढ़ने से उत्तरी ग्रिड के फेल होने की आशंका भी जताई जा रही है। खबरों के मुताबिक, उत्तरी ग्रिड पर संकट उत्तर प्रदेश के चलते बढ़ा है। यूपी ने बुधवार को उत्तरी ग्रिड से तय मानक से ज्यादा बिजली ली है, जिससे ग्रिड पर दबाव बढ़ गया।
फिलहाल अधिकारी पूरे मामले पर नजर रखे हुए हैं। जिससे किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
हालांकि ये कोई पहली बार नहीं है जब बिजली का ऐसा संकट नजर आ रहा हो। साल 2012 में भी देश को दो सबसे बड़े ब्लैकआउट का सामना करना पड़ा था। जब अगस्त 2012 में भी उत्तरी ग्रिड के फेल होने के कारण देश की आधी आबादी को बिजली संकट झेलना पड़ा था। उस समय उत्तर और पूर्वी भारत के निवासी करीब 24 घंटे तक अंधेरे में रहे थे।