रियल एस्टेट व शराब कारोबारी पोंटी चड्ढा हथियार चलाने में असमर्थ थे। इसके बावजूद वह पिस्टल रखते थे। सवाल उठता है कि आखिर पोंटी चड्ढा को लाइसेंस किस आधार पर मिल गया। पुलिस की लाइसेंसिंग ब्रांच के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मधुप तिवारी ने बताया कि अशक्त या फिर हथियार चलाने में असमर्थ व्यक्ति को लाइसेंस नहीं दिया जा सकता। पोंटी ने यूपी से लाइसेंस लिया हुआ था।
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पोंटी ने .30 पिस्टल का लाइसेंस लिया हुआ था। महरौली थाना पुलिस ने इस बाबत लाइसेंसिंग ब्रांच से रिपोर्ट मांगी है। सूत्रों से पता चला है कि लाइसेंसिंग ब्रांच के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मधुप तिवारी पोंटी को लाइसेंस मामले की रिपोर्ट खुद तैयार कर रहे हैं। हालांकि लाइसेंसिंग ब्रांच हथियारों का लाइसेंस देने से पहले डॉक्टर की रिपोर्ट देखती है।
पोंटी के कुछ करीबियों ने बताया कि पोंटी के एक हाथ का पंजा नहीं था और दूसरे हाथ के पंजे की एक अंगुली और अंगूठा नहीं था। वहीं, महरौली थाना पुलिस को पोंटी के पिस्टल के लाइसेंस की प्रति मिल गई है। पुलिस अधिकारी ने खुलासा किया है कि हरदीप ने भी दो पिस्टल के लाइसेंस ले रखे थे। दिल्ली पुलिस ने इस बात की जांच के आदेश दे दिए हैं कि पोंटी चड्ढा को लाइसेंस कैसे मिल गया।
चड्ढा फैमिली को कई राज्यों से मिले लाइसेंस
चड्ढा फैमिली के मेंबरों के पास लाइसेंसी असलहों की कमी नहीं है। मुरादाबाद प्रशासन ने ही नौ लोगों के नाम पर तेरह लाइसेंस जारी किए हैं। इनमें रिवाल्वर, रायफल और बंदूक हैं। कई तो ऐसे हैं जिनके पास तीन-तीन हथियार हैं। इस ग्रुप के लोगों को यूपी से ही नहीं, बल्कि दिल्ली, पंजाब और हरियाणा तक से शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए। पोंटी चड्ढा की हत्या के बाद इंटेलीजेंस ने इसकी पड़ताल शुरू कर दी है। दिल्ली पुलिस भी इन राज्यों से रिकार्ड जुटा रही है।
पोंटी चड्ढा की पैठ कई प्रांतों की सरकार में थी। सुरक्षा के लिहाज से उनकी अपनी फोर्स तो थी ही पुलिस से भी अंगरक्षक मिले हुए थे। इस ग्रुप के लोग अत्याधुनिक असलहों के शौकीन रहे हैं। दिल्ली के जिस फार्म हाउस पर पोंटी चड्ढा और उनके भाई हरदीप की हत्या हुई थी वहां से भी पुलिस ने असलहे बरामद किए। यहां से होने वाली हथियारों की बरामदगी ने पुलिस जांच का दायरा भी बढ़ा दिया। इन सभी राज्यों से लाइसेंसों का रिकार्ड मांगा जा रहा है।
मुरादाबाद प्रशासन ने भी वर्ष 1995 से आज तक कुल 13 लाइसेंस जारी किए हैं। यह लाइसेंस 9 लोगों के नाम पर है। पोंटी चड्ढा और हरदीप के नाम से मुरादाबाद में कोई लाइसेंस नहीं बना है। जिलाधिकारी संजय कुमार का कहना है कि अब पुलिस से यह रिपोर्ट मांगी जा रही है कि जिन नौ लोगों के नाम से लाइसेंस जारी हुए हैं उनके नाम पर थाने में कोई आपराधिक केस तो दर्ज नहीं है। अगर किसी थाने में मुकदमा पंजीकृत होगा तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी।