महाराष्ट्र में मुस्लिम आरक्षण रद्द किए जाने के फैसले से राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इसके विरोध में बजट सत्र नहीं चलने देने की धमकी दी है। सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। प्रदेश के नवनियुक्त कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने कहा कि मुस्लिम आरक्षण समाप्त करने से भाजपा के ‘सबका साथ-सबका विकास’ के नारे की पोल खुल गई है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आनन-फानन में मुस्लिम आरक्षण रद्द करने का फैसला किया है। अशोक चव्हाण और मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरूपम ने संयुक्त प्रेसवार्ता में मुस्लिम आरक्षण को लेकर देवेंद्र फडणवीस सरकार पर हमला बोला।
उन्होंने बजट सत्र में सरकार को निर्णय वापस लेने के लिए बाध्य कर देने का संकल्प लिया है। उधर, महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि मुस्लिम आरक्षण संबंधी अध्यादेश के कानून में रूपांतरित न होने के कारण इस अध्यादेश की अवधि 2 दिसंबर 2014 को ही समाप्त हो गई। इसलिए नए सिरे से जारी शासनादेश में मुसलमानों को शिक्षा में दिया गया आरक्षण भी समाप्त कर दिया गया है। हालांकि महाराष्ट्र में मुस्लिम समाज की पिछड़ी जातियों को पहले से ही आरक्षण का लाभ मिल रहा है।
क्या है मामला
विधानसभा चुनाव के मौके पर कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार ने 9 जुलाई 2014 को अध्यादेश जारी कर मुस्लिम समाज की विभिन्न पिछड़ी जातियों को शिक्षा और नौकरियों में 5 प्रतिशत और मराठों के लिए विशेष पिछड़ा वर्ग के तहत 16 प्रतिशत आरक्षण लागू किया था। भाजपा की नई सरकार ने आते ही इस फैसले को बदल दिया। देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने मराठों को आरक्षण के लिए नया कानून पेश किया, लेकिन मुस्लिम आरक्षण के लिए 29 मार्च 1997 को जारी की गई सूची के आधार पर आरक्षण लागू करने का फैसला किया है।