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संसद में गरमाई यूपी की सियासत

Fri, 23 Nov 2012 12:22 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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संसद के शीत सत्र के पहले दिन बृहस्पतिवार को दोनों सदनों में उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई। भले ही लोकसभा और राज्यसभा में भाजपा और माकपा ने रिटेल में एफडीआई के खिलाफ जोरदार हंगामा किया, लेकिन सपा और बसपा ने प्रमोशन में आरक्षण और यूपी की कानून व्यवस्था के मामले में जमकर सियासत की।
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रसोई गैस सिलेंडर में कटौती करने के यूपीए सरकार के फैसले के खिलाफ भी आवाज उठाई गई। बसपा ने लोकसभा में उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मांग बुलंद की तो राज्यसभा में उसने प्रमोशन में आरक्षण देने का मुद्दा उठाया। वहीं सपा ने प्रमोशन में आरक्षण का विरोध किया और रसोई गैस सिलेंडर में कटौती की मांग को लेकर हंगामा किया।

बसपा ने संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही हमलावर रुख अपना लिया है। लोकसभा में पार्टी ने राज्य में कानून व्यवस्था की खराब स्थिति का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मांग की। सदन के बाहर बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि प्रदेश में जो हालात पैदा हो गए हैं उसे देखते हुए अब केंद्र की जिम्मेदारी बनती है कि वह वहां राष्ट्रपति शासन लगाए। अगर प्रदेश में केंद्र सरकार हस्तक्षेप नहीं करती तो वहां हालात और खराब हो जाएंगे और इसके लिए प्रदेश की जनता सपा के साथ-साथ केंद्र सरकार को भी माफ नहीं करेगी।
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इसके अलावा बसपा ने राज्यसभा में प्रमोशन में आरक्षण पर संविधान संशोधन विधेयक लाने की मांग की। मायावती ने कहा कि राज्यसभा में यह बिल लाया जा चुका है। इसलिए हमने सरकार से मांग की है कि वह सदन का सारा कामकाज बाद में करे और सबसे पहले विधेयक पर चर्चा करवाएं।

उधर, सपा ने राज्यसभा में बसपा की प्रमोशन में आरक्षण की मांग का विरोध किया। राज्यसभा में सपा ने एलपीजी गैस सिलेंडर की कटौती का मुद्दा उठाते हुए इसकी संख्या बढ़ाने की मांग की। सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने एफडीआई की बजाय इन मुद्दों को उठाने को जायज ठहराते हुए कहा कि रसोई गैस सब्सिडी कटौती आम आदमी की रोजाना की जिंदगी से जुड़ा अहम मसला है।
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