क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और वैज्ञानिक सीएनआर राव को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा के बाद इस सर्वोच्च सम्मान पर सियासत अचानक गरमा गई है।
खासतौर पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और हॉकी के जादूगर ध्यानचंद को भारत रत्न नहीं दिए जाने पर सरकार की नीयत पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
खास बात यह है कि वाजपेयी को तत्काल भारत रत्न देने की मांग न केवल भाजपा ने की है बल्कि केंद्र सरकार के भीतर से भी ऐसे ही सुर सामने आने लगे हैं।
कांग्रेस नेता और मानव संसाधन विकास मंत्री एम पल्लमराजू और सरकार में सहयोगी नेशनल कांफ्रेंस के प्रमुख व केंद्रीय मंत्री फारूक अब्दुल्ला ने वाजपेयी को तत्काल देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की मांग की।
फारूक ने तो सरकार को यह भी याद दिलाया कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने पहली बार सांसद बने वाजपेयी को देश का भावी प्रधानमंत्री बताया था।
भाजपा से बीते दिनों 17 साल पुराना रिश्ता तोड़ने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तो वाजपेयी को अब तक भारत रत्न न दिए जाने पर आश्चर्य जाहिर किया।
हालांकि भारत रत्न की इस सियासत में टीडीपी ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे एनटी रामाराव, तो नीतीश ने लगे हाथों राममनोहर लोहिया और कर्पूरी ठाकुर को भी सर्वोच्च सम्मान देने की मांग कर डाली।
खेल मंत्रालय की सिफारिश के बावजूद ध्यानचंद को अब तक इस सम्मान से वंचित रखने और वाजपेयी को यह सम्मान नहीं देने पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
पल्लमराजू ने वाजपेयी को भारतीय राजनीति का महान स्टेट्समेन बताते हुए कहा कि यदि देश चाहता है तो उन्हें सर्वोच्च सम्मान मिलना चाहिए।
वाजपेयी महान नेता: फारूक अब्दुल्ला
इसी कड़ी में फारूक अब्दुल्ला ने वाजपेयी को महान नेता बताते हुए उन्हें सर्वोच्च सम्मान तत्काल दिए जाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि हालांकि वह भाजपा के सदस्य नहीं हैं, मगर कोई भी भारतीय वाजपेयी के योगदान की अनदेखी नहीं कर सकता।
'आखिर वाजपेयी को यह सम्मान क्यों नहीं दिया गया'
नीतीश ने सचिन और राव को सर्वोच्च सम्मान दिए जाने के फैसले का स्वागत करते हुए सवाल उठाया कि आखिर वाजपेयी को यह सम्मान क्यों नहीं दिया गया?
नीतीश ने कहा कि भारतीय राजनीति में वाजपेयी का योगदान बहुत बड़ा है। इन नेताओं के अलावा भाजपा की सहयोगी शिवसेना और अकाली दल ने भी वाजपेयी को भारत रत्न दिए जाने की मांग की।
मालूम हो कि सचिन और राव को सर्वोच्च सम्मान दिए जाने के फैसले का स्वागत करते हुए भाजपा ने कांग्रेस पर भारत रत्न दिए जाने के मामले में भी परिवारवाद अपनाने का आरोप लगाया था।