माननीय अब कामकाज के मूड में नहीं दिख रहे हैं।
संसद के मानसून सत्र के पहले तीन हफ्तों की बैठकों के कामकाज से तो यही संदेश गया है कि वे अब चुनावी मूड में आ चुके हैं। यूपीए सरकार को चौतरफा घिरी देख अब माननीय भी मानने लगे हैं कि लोकसभा की चुनाव जंग बहुत निकट है।
राज्यसभा में तो कामकाज का कुछ माहौल दिख भी रहा है, लेकिन लोकसभा में सांसद अब सदन में विधायी कामकाज को लेकर ज्यादा गंभीर नहीं दिख रहे हैं। वे शनिवार और रविवार को अब दिल्ली में टिकने की बजाए अपने-अपने क्षेत्रों में चले जा रहे हैं।
माकपा के बसुदेव आचार्य मानते हैं कि सांसद अब चुनाव के मूड में आ चुके हैं। इसलिए सदन में जबरदस्ती हंगामा करके यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे जनता से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा तो पहले से ही चाहती है कि जल्दी से चुनाव हों। बहरहाल, लोकसभा में स्थिति यह है कि सांसद सदन में टिकना ही नहीं चाहते हैं।
चार साल तक अपने क्षेत्रों से नदारद रहने वाले सांसद भी अब ज्यादा से ज्यादा समय जनता के बीच गुजारना चाहते हैं। रक्षाबंधन के लिए भी संसद में अवकाश कराने के पीछे यही मुख्य वजह थी।
इसके अलावा खाद्य सुरक्षा बिल को पारित कराने के लिए जब शनिवार को लोकसभा की विशेष बैठक का ऐलान किया गया, तो बड़ी संख्या में सांसदों ने मौजूद रहने में असमर्थता जता दी।
इस पर बिल को आगे के लिए टालना पड़ा। शनिवार को भी शून्यकाल के बाद ज्यादातर सांसद अपने क्षेत्रों के लिए रवाना हो गये और सदन में बहुत कम उपस्थिति रही।
कांग्रेस सांसद जगदंबिका पाल भी मानते हैं कि ज्यादातर सदस्य अपना अधिकतर समय अपने क्षेत्रों में दे रहे हैं क्योंकि यह चुनावी साल है।
प्रमुख विपक्षी दल भाजपा तो लंबे समय से कहती ही रही है कि लोकसभा चुनाव तय समय से पहले होंगे। पार्टी के उपाध्यक्ष व राज्यसभा सांसद मुख्तार अब्बास नकवी कहते हैं कि सांसद ही नहीं बल्कि सरकार भी चुनावी मूड में हैं।
दरअसल, महंगाई, भ्रष्टाचार, बदहाल अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर यूपीए सरकार को घिरी देख भाजपा तो पहले से ही चुनाव के लिए तैयार भी बैठी है।