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महंगाई का कहर राजनीतिक एजेंडे से हुआ गायब

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देश में महंगाई की मार आम आदमी की जेब तक सीमित रह गई है। महंगाई की मार देश के राजनीतिक दलों लिए कुछ छोटी मोटी टीका टिप्पणियों से ज्यादा कोई बड़ा मुद्दा नहीं है।
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मोदी सरकार आसमान छूते प्याज और दाल के दामों को काबू करने के लिए उठाए गए तमाम उपायों को बताने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। मगर जमीन पर ये उपाय आम आदमी के लिए फायदे का सौदा साबित नहीं हो रहे है।

दूसरी तरफ विपक्षी दल भी कभी-कभार ही महंगाई जैसे आम आदमी के मुद्दे पर बोल कर अपना समय खर्च कर रहे हैं। एक दूसरे पर छींटाकशी करने में व्यस्त सियासी दल इस मुद्दे पर आंदोलन या सड़कों पर उतरने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं।
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अभी बीते मंगलवार को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पारित हुए राजनीतिक प्रस्ताव में पार्टी ने महंगाई पर कुछ शब्दों की चिंता जाहिर कर दी। महिला कांग्रेस के कार्यकर्त्ताओं ने दिल्ली में भाजपा मुख्यालय के बाहर प्याज को लेकर एक दिन धरना प्रदर्शन किया। कांग्रेस ललित मोदी गेट और व्यापमं के मुद्दे पर ज्यादा मुखर है।

इस मुद्दे पर पार्टी ने संसद का मानसून सत्र हंगामे में धो दिया। मगर पार्टी महंगाई के मुद्दे की गंभीरता और गहराई में जाने की कोशिश नहीं की गई।

कांग्रेस प्रवक्ता अजय कुमार कहते हैं कि पार्टी लगातार इस मुद्दे को हटा रही है। उसकी ओर से सोशल मीडिया पर भी अभियान चल रहा है।
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प्याज और दालों के बढ़ते दाम पर राजनीतिक चुप्पी

अजय कुमार ने कहा कि पार्टी ने ही सबसे पहले कहा कि मोदी सरकार में मुर्गी और दाल के दाम बराबर हो गए है। देश में सिर्फ प्याज के दाम ही नहीं 70 से 80 रूपए किलो है बल्कि अरहर 145, मूंग 115, उड़द 125 और मसूर की दाल 95 रूपए बिक रहे हैं। एक साल में लगभग सभी दालों के दाम 50 से 90 रूपए ज्यादा बिक गए हैं।

आम आदमी का बजट संकट में पड़ गया है। मगर विपक्षी दल जुबानी जंग में फंसे हुए है। बिहार चुनाव को देखते हुए महंगाई का जिक्र थोड़ा बहुत हो रहा है। मगर हवाबाज, हवालाबाज, चुनावी जुमले और टिकट बंटवार को लेकर चल रही जुबानी जंग से ज्यादा राजनीतिक बहस आगे नहीं बढ़ पा रही है।

जदयू के केसी त्यागी कहते है कि बिहार में जदयू इस मुद्दे को जोर शोर से उठा रही है। मोदी सरकार को इस मुद्दे पर पर्दाफाश किया जाएगा। प्याज के अलावा बाकी सब्जियों के बुरे हाल है।

मगर इस मुद्दे को लगातार उठाने की कोशिश नहीं की जा रही है। राजनीतिक जानकार कहते है कि शायद यही कारण है कि प्याज और दालों के दाम एक महीने से कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं।  

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