छत्तीसगढ़ में चुनावी जीत की हैट्रिक की कोशिश में जुटी भाजपा को अब नक्सलवाद के तौर पर एक बड़ा चुनावी मुद्दा मिल गया है।
कांग्रेस के हमलों से जूझ रही भाजपा अब गोवा सम्मेलन में छत्तीसगढ़ चुनाव के लिए नक्सल मुद्दे पर मैदान में उतरने की रणनीति भी तय करेगी।
भाजपा को उम्मीद है कि वह गुजरात की तरह मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी चुनावी जीत की हैट्रिक बना लेगी।
छत्तीसगढ़ में भाजपा अब तक अटल खाद्यान्न योजना के तहत सस्ते दर पर चावल देने की योजना को अपनी खास उपलब्धि गिनाती रही है।
इसलिए पार्टी में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह को ‘चावल बाबा’ के नाम से भी पुकारा जाता रहा है, लेकिन अब चावल की बजाए नक्सल को भाजपा ने प्रमुख मुद्दा बनाने का फैसला किया है। इसलिए पार्टी ने गोवा में नक्सल मुद्दे को अपने एजेंडे में रखा है। इसमें कांग्रेस खास निशाने पर रहेगी।
पार्टी ने तय किया है कि छत्तीसगढ़ की नक्सली घटना पर पार्टी गोवा सम्मेलन तक कांग्रेस के खिलाफ ज्यादा हमलावर रुख नहीं अपनाएगी। लेकिन उसके बाद कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोलेगी।
इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के कांग्रेस संदेश में लिखे लेख से लेकर महासचिव दिग्विजय सिंह, मणिशंकर अय्यर और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश के बयानों और लेखों को जनता तक पहुंचाया जाएगा।
इसके साथ ही कांग्रेस और नक्सल समर्थक माने जाने वाले विनायक सेन, अरुंधति राय और हर्षमंदर आदि के संबंधों का भी खुलासा किया जाएगा।
भाजपा यह भी बताएगी कि किस तरह तत्कालीन गृहमंत्री पी चिदंबरम के नक्सलियों के खिलाफ जारी अभियान को कांग्रेस नेताओं के बंद करा दिया।
भाजपा दिग्विजय सिंह के नक्सल समर्थक लेखों को तो अभी से जनता के बीच प्रचारित करने लगी है। इसके साथ ही पार्टी गोवा सम्मेलन में ही तय करेगी कि यूपीए सरकार के खिलाफ स्थगित कर दिए गए जेल भरो आंदोलन को फिर कब से शुरू किया जाए।