बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने यूपी पुलिस पर नोएडा रेप केस को दबाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि यूपी में अपराध बढ़ रहे हैं और बलात्कारों से पूरा प्रदेश दहल उठा है लेकिन सरकार अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के बजाय उन्हें बचाने में लगी है। उन्होंने प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की।
एक प्रेस कांफ्रेंस में मायावती ने कहा कि नोएडा रेप केस में यूपी पुलिस की भूमिका संदिग्ध है। उन्होंने कहा नोएडा में दलित लड़की की बलात्कार के बाद हत्या के मामले को पुलिस दबाना चाहती थी। पुलिस पीड़ित के परिजनों पर वारदात की रात ही अंतिम संस्कार का दबाव बना रही थी लेकिन जनता और मीडिया के दबाव में उसे झुकना पड़ा।
वहीं, गारमेंट एक्सपोर्ट कंपनी से ड्यूटी कर लौट रही दलित युवती की दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में पांच सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है जबकि चौकी प्रभारी को लाइन हाजिर किया गया है। पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी अभी फरार है। वहीं, जिला प्रशासन ने युवती के परिवार को डेढ़ लाख रुपये आर्थिक सहायता के रूप में दिए हैं।
दिल्ली गैंगरेप से सबक लेते हुए पुलिस अधिकारियों ने इस संबंध में कार्रवाई करने में कोई देरी नहीं की। पुलिस ने कैलाश और नरेश नामक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक अन्य आरोपी उदयवीर अभी फरार है। आरोपियों में से एक युवती का परिचित बताया जा रहा है।
एसएसपी ने रविवार देर शाम सेक्टर-63 पुलिस चौकी पर तैनात सिपाही रमेश, अवधेश व ओंकार के अलावा पीसीआर-46 पर तैनात सिपाही शैलेंद्र सिंह व राजकुमार को निलंबित कर दिया। मॉडल टाउन चौकी प्रभारी रविंद्र कुमार राठी को लाइन हाजिर कर दिया गया। एसएसपी ने इस प्रकरण में अन्य पुलिसकर्मियों पर भी जांच के बाद कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि शनिवार सुबह घर के पास युवती का शव अर्धनग्न हालत में झाड़ियों में मिला था और शरीर पर नाखूनों से खरोंचे जाने के निशान भी थे।
दूसरी ओर रविवार को घटना को लेकर लोगों ने प्रदर्शन किए। पुलिस के प्रति महिलाओं में जबरदस्त आक्रोश देखा गया। युवती के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए कई राजनीतिक पार्टियां भी खड़ी हो गईं। कई पार्टियों के नेता युवती के परिजनों को सांत्वना देने उनके घर पहुंचे।