पोंटी के शव के पोस्टमार्टम के तौर-तरीकों पर सवाल उठने लगे हैं। पहली बार पोस्टमार्टम प्रक्रिया में करीब छह घंटे लगे। इसके बाद शाम पांच बजे शव परिजनों को सौंप दिए गए लेकिन डेढ़ घंटे बाद शव को दोबारा पोस्टमार्टम के लिए एम्स लाया गया।
दोबारा पोस्टमार्टम के बाद देर रात दोनों भाइयों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। पोस्टमार्टम विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल बोर्ड बनाए जाने के बावजूद पोंटी के शरीर में गोली छोड़ना गलत था। फिर पोस्टमार्टम से पूर्व एहतियातन गोलियों की संख्या व जगह का पता करने के लिए एक्सरे भी कराया गया था। एम्स जैसे संस्थान से जुड़े बोर्ड ने इतनी बड़ी गलती कैसे की?
कागजी कार्यवाही के बाद रविवार शाम करीब पांच बजे परिजनों को दोनों शव सौंप दिए गए। शवों को अलग-अलग एम्बुलेंस से छतरपुर स्थित फार्म हाउस के लिए ले जाया गया। लेकिन शाम साढ़े छह बजे के करीब सूचना आई कि शव को दोबारा पोस्टमार्टम के लिए एम्स लाया गया है।
आधिकारिक तौर पर कोई बताने को तैयार नहीं था कि शरीर में कितनी गोलियां रह गई थीं। पूरे मामले में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के अलावा पुलिस अधिकारियों की भी लापरवाही उजागर हुई है। फोरेंसिक विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे मामलों में शरीर में कितनी गोली लगी है इसका पता लगाने के लिए एक्स-रे किया जाता है।
एक्स-रे में यह स्पष्ट हो जाता है कि कितनी गोलियां हैं और शरीर के किन हिस्सों में हैं। मामले में एक्स-रे के बाद सभी गोलियां निकाले बिना शव परिजनों के सुपुर्द कर देना गैर जिम्मेदाराना है। शरीर से निकाली गई गोलियां अदालत में पेश की जाती हैं।