महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों को रोकने और उनकी सुरक्षा एवं त्वरित
कार्रवाई को लेकर आला पुलिस अफसर लंबे-चौड़े दावे करते हैं। जबकि उन्हीं के
मातहत रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचने वाले पीड़ित को थाने से ही भगा देते
हैं।
इस निकम्मी पुलिस का अमानवीय चेहरा उस समय देखने को मिला, जब
मनचलों के हमले से बुरी तरह घायल फौजी मिलेट्री अस्पताल में मौत से लड़ रहा
था। इसके बावजूद पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने के बजाए पीड़ित पक्ष को धक्के
देकर थाने से भगा रही थी। जब फौजी का पिता थाने पहुंचा तो रिपोर्ट दर्ज हो
पाई।
पुलिस के इस निकम्मेपन का शिकार कोई आम आदमी नहीं बल्कि देश के
लिए मर मिटने वाले फौजी का परिवार हुआ। शहीद वेदमित्र के पिता तेजपाल सिंह
ने बताया कि इस घटना के बाद वेदमित्र को उनके ससुराल पक्ष के रिश्तेदारों
ने मिलेट्री अस्पताल में भर्ती कराया था।
जिसके बाद करीबी रिश्तेदार
थाना टीपी नगर पर इस घटना की सूचना देने और रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचा था।
थाने पर मौजूद दीवान को पूरी घटना बताते हुए छेड़छाड़ और जानलेवा हमले की
धाराओं में केस दर्ज करने की तहरीर दी गई।
लेकिन दीवान ने रिपोर्ट
दर्ज करना तो दूर, बहाना बनाते हुए तहरीर लेने से ही इंकार कर दिया। जिसको
लेकर दीवान से तीखी नोकझोंक भी हो गई।
बकौल तेजपाल, सूचना मिलने पर
वह शामली से मेरठ पहुंचे तो उन्होंने थाने पहुंचकर इस पर नाराजगी जताई। तब
जाकर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की। उधर, थानाध्यक्ष प्रशांत कपिल इस मामले में
अपने स्टाफ का बचाव करते नजर आए।
उनका कहना है कि पीड़ित की
रिपोर्ट लिखने से इंकार नहीं किया गया था। उन्हें मेडिकल परीक्षण कराने को
कहा गया था। बता दें कि ऐसे मामलों में घायल का मेडिकल परीक्षण भी पुलिस के
द्वारा ही किया जाता है।