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पुलिस हिरासत में 'किस ऑफ़ लव' के आयोजक

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कोच्चि में चल रहे 'किस ऑफ़ लव' के 30 प्रदर्शनकारियों को एहतियातन पुलिस ने हिरासत में लिया है। खबर की पुष्टि करते हुए कोच्चि पुलिस आयुक्त केजी जेम्स ने बीबीसी हिंदी से कहा कि इन प्रदर्शनकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हिरासत में लिया गया है।
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पुलिस आयुक्त के मुताबिक़ इन आयोजकों ने प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं ली थी। एक आयोजक ने बीबीसी को कोच्चि के मरीन ड्राइव इलाके से फोन पर बताया कि प्रदर्शन के लिए काफी लोग इकट्ठे हुए लेकिन पुलिस की कार्रवाई के बाद वहां अफरातफरी का माहौल है।

इससे पहले भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के केरल राज्य सचिव लिंगिनलाल ने बीबीसी को बताया था, "हम 'किस ऑफ लव' कार्यक्रम के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेंगे। हमें ऐसा नहीं लगता है कि यह युवा मोर्चा के खिलाफ है।"
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पिछले हफ्ते कालीकट के एक कैफे में एक हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने यह कहते हुए तोड़फोड़ मचाई थी कि इस जगह का इस्तेमाल डेटिंग के लिए किया जाता है।

उसी हमले के विरोध में फेसबुक ग्रुप "फ्री थिंकर्स" ने कोच्चि के मरीन ड्राइव में रविवार शाम 'किस ऑफ लव' प्रदर्शन का आयोजन किया था।
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कानून और समर्थन

हालंकि फ्री थिंकर्स से जुड़े ऑनलाइन एक्टिविस्ट फर्मिस हाशिम का कहना था, "भारतीय दंड संहिता के मुताबिक़ ऐसा कोई कानून नहीं है जो दो लोगों को मर्जी से किस करने या गले लगाने या किस करने से रोकता हो। अश्लीलता को लेकर धारा 294 जरूर है, जो सार्वजनिक अश्लीलता को अपराध मानती है। उसमें भी कहीं भी किस करने या गले लगाने का कोई जिक्र नहीं है।"

शुक्रवार को केरल हाईकोर्ट ने इस बारे में दाखिल एक याचिका पर कहा था कि अदालत इसमें दख़ल नहीं देगी। इस अभियान को सोशल मीडिया पर भी समर्थन मिल रहा है।

किस ऑफ लव का विरोध कर रहे संगठन सार्वजनिक स्थानों पर चुंबन को अश्लीलता मानते हैं। पिछले हफ्ते फेसबुक पर शुरू हुए 'किस ऑफ़ लव' पेज से अब तक 50 हज़ार से अधिक लोग जुड़ चुके हैं।

फर्मिस कहते हैं, "राजनीतिक, साहित्य और सिनेमा जगत से भी हमें समर्थन मिल रहा है। ज़्यादातर लोग हमारा समर्थन कर रहे हैं। हमने एक छोटी सी शुरुआत की थी। हमें नहीं मालूम था कि इतना अपार समर्थन मिलेगा और केरल और भारत में इस मुद्दे पर इतनी चर्चा होगी।"

लेकिन सवाल यह है कि क्या इस आयोजन से मॉरल पुलिसिंग बंद हो जाएगी। फर्मिस को लगता है कि इसमें वक्त लगेगा। वे कहते हैं, "हमें लगता है कि मॉरल पुलिसिंग एक दिन या एक साल में खत्म नहीं होगी पर विरोध से इसमें कमी जरूर आएगी और यही हमारी कामयाबी होगी।"
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