भारतीय राजनीति के इतिहास में काला अध्याय कहे जाने वाले इमरजेंसी की घोषणा से जुड़े दस्तावेज ढूंढने में प्रधानमंत्री कार्यालय नाकाम रहा।
पीएमओ ने मुख्य सूचना आयोग के निर्देश के बावजूद तत्कालीन प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच 1975 में इमरजेंसी लगाने की घोषणा के संबंध में हुए पत्राचार के कागजात गायब होने पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
पीएमओ ने अपने जवाब में कहा है कि दस्तावेज ढूंढने का प्रयास किया गया, लेकिन उसकी खोज संभव नहीं हो पाई।
यही नहीं पीएमओ ने यह भी कहा है कि आरटीआई में पूछे गए प्रश्नों से जुड़े दस्तावेज के उपलब्ध न होने को ही समाधान मान लिया जाए।
साथ ही यह कहा गया कि संबंधित दस्तावेज संस्कृति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय अभिलेखागार में उपलब्ध हो सकते हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय से सूचना के अधिकार के तहत हाथरस निवासी आरटीआई कार्यकर्ता गौरव अग्रवाल ने नवंबर, 2012 में इमरजेंसी लगाने के संबंध में सूचनाएं मांगी थी।
आरटीआई में पूछा गया था कि क्या वर्ष 1975 में इमरजेंसी लगाने की घोषणा से संबंधित तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के बीच हुए पत्राचार से संबंधित फाइल पीएमओ से गायब हो गई है। यदि नहीं तो क्या फाइल सुरक्षित है।
लेकिन जवाब में गत जनवरी में पीएमओ ने स्पष्ट जवाब न देते हुए कहा था कि आपातकाल की घोषणा से संबंधित कोई दस्तावेज/पत्र/मिसिल पीएमओ में उपलब्ध नहीं है। इसके बाद अग्रवाल ने केंद्रीय सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया।
आयोग ने अप्रैल में आरटीआई कार्यकर्ता की अपील पर प्रथम अपीलीय प्राधिकरण, पीएमओ को निर्देश जारी किया, जिसमें कार्य के 20 दिनों में आरटीआई में पूछे गए सवालों का निपटारा करने को कहा गया है।
साथ ही निपटारे के बारे में आयोग के उप रजिस्ट्रार को सूचित करने का निर्देश दिया। लेकिन पीएमओ के अपील अधिकारी ने कहा कि कार्यालय में इमरजेंसी लगाने के दस्तावेजों को नहीं खोजा जा सका।
मुख्य सूचना आयुक्त सत्येंद्र मिश्रा ने अपील पर दिए गए फैसले में कहा है कि यदि शिकायतकर्ता अपीलीय प्राधिकरण की ओर से निपटारे के संबंध में जारी किए गए आदेश से संतुष्ट नहीं होता, ऐसी स्थिति में वह आरटीआई अधिनियम की धारा 19 (3) के तहत अपील करने के लिए स्वतंत्र है।
अग्रवाल ने प्रथम अपीलीय प्राधिकार, पीएमओ में अपील न करके सीधे सीआईसी में आवेदन किया था। इस आवेदन को प्रथम अपील मानते हुए आयोग ने प्राधिकार को आदेश दिया था।