प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नौ महीने के कार्यकाल के दौरान विपक्ष के लगाए गए आरोपों का उत्तर देने के लिए राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देने का वक्त चुना।
उन्होंने बेहद सधे शब्दों में व्यंग्यात्मक हमले से एक-एक आरोप का जवाब दिया। प्रधानमंत्री ने मनरेगा योजना को बंद करने संबंधी आरोपों का अपने ही अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मेरे विरोधी भी मानेंगे कि मुझमें राजनीतिक सूझबूझ है।
मनरेगा कांग्रेस के 60 सालों के पापों का नतीजा है। यह उसकी विफलता का स्मारक है। ऐसे में हम इसे बंद करने की गलती करने के बदले पूरे तामझाम और गाजे-बाजे के साथ इस योजना को पेश करते रहेंगे, जिससे लोगों को पता चलता रहे कि आजादी के 60 साल बाद भी कौन लोगों से गड्ढे भरवा रहा है।