फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मोदी ने दी प्रधानमंत्री पद छोड़ने की धमकी

विज्ञापन
विज्ञापन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीधी धमकी के बाद संघ के हिंदुत्ववादी चेहरे माने जाने वाले संगठनों और नेताओं के तेवर ढीले पड़ गए हैं।
विज्ञापन


मोदी ने संघ नेताओं से साफ कह दिया कि या तो वे विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल जैसे अनुषांगिक संगठनों की मुहिम को रोकें अन्यथा स्वतंत्रता पूर्वक उन्हें काम करने नहीं दिया गया तो वह अपना पद छोड़ने में भी देर नहीं करेंगे।

प्रधानमंत्री ने संघ नेताओं से कहा कि जनता ने उन्हें पूर्ण बहुमत सुशासन, विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए दिया है। इसलिए पहले अर्थव्यवस्था की गाड़ी पटरी पर लाना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। राम मंदिर और दूसरे मुद्दे उसके बाद देखे जाएंगे। प्रधानमंत्री के आग्रह के बाद संघ नेतृत्व ने विहिप और बजरंग दल को अपने कदम पीछे खींचने के निर्देश दिए।
विज्ञापन

स्वतंत्रता पूर्वक काम करना चाहते हैं मोदी

संघ नेतृत्व के बेहद करीबी सूत्रों का कहना है कि इसके बाद न सिर्फ अलीगढ़ में विहिप की ईसाइयों और मुसलमानों को हिंदू बनाने की कथित ‘घर वापसी’ मुहिम स्थगित की गई, बल्कि यह भी तय किया गया कि कम से कम अगले दो साल तक राम मंदिर के मुद्दे पर भी जोर नहीं दिया जाएगा।

राम जन्मभूमि बनाम बाबरी मस्जिद मुकदमे के मुस्लिम पक्षकार मोहम्मद हाशिम अंसारी की प्रधानमंत्री से मुलाकात मोदी के इस कड़े रुख के बाद ही रद्द की गई। खुफिया एजेंसियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय को चेताया था कि अयोध्या मामले में अदालत के बाहर की कोई भी पहल सरकार के लिए नया संकट पैदा कर सकती है।

विश्व हिंदू परिषद के सर्वोच्च नेता अशोक सिंघल खुद इस मामले में सीधे दिलचस्पी ले रहे थे और लगातार अंसारी के संपर्क में थे। यही नहीं बुधवार को जब संघ नेताओं को पता चला कि सिंघल वाराणसी में ‘घर वापसी’ कार्यक्रम आयोजन करने जा रहे हैं, तो उनकी उलझन बढ़ गई। सिंघल पर दबाव बनाकर उसे रुकवाया गया।
विज्ञापन

अर्थव्यवस्था पटरी पर लाना सरकार की प्राथमिकता

सूत्रों के मुताबिक राम मंदिर को लेकर भाजपा नेताओं के विवादास्पद बयानों और विश्व हिंदू परिषद व बजरंग दल की कथित घर वापसी की मुहिम से आजिज मोदी ने संघ के शीर्ष नेताओं से बात की। पिछले दिनों दिल्ली में प्रधानमंत्री के साथ संघ के कुछ शीर्ष नेताओं की बैठक हुई।

बैठक में प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि उन्हें काम करने के लिए वक्त चाहिए। वह विदेशों में भारत की सकारात्मक छवि बनाकर निवेश आमंत्रित कर रहे हैं, जबकि विहिप और बजरंग दल की मुहिम सब किए कराए पर पानी फेर देगी और विपक्ष को सरकार व संघ परिवार के खिलाफ खड़े होने का मौका मिल जाएगा।

केंद्र में पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार बनने के बाद से ही संघ परिवार के अशोक सिंघल, प्रवीण तोगड़िया जैसे कट्टर हिंदुत्ववादी नेता लगातार अयोध्या में राम मंदिर और अन्य हिंदुत्ववादी एजेंडे को लागू करने का दबाव बना रहा है।

इनके पीछे भाजपा के भी कुछ वरिष्ठ नेताओं का मौन समर्थन है जो मोदी सरकार को विफल देखना चाहते हैं। इनमें कुछ वो कट्टर हिंदुत्ववादी चेहरे भी शामिल हैं, जिन्हें वरिष्ठता के बावजूद मोदी सरकार में जगह नहीं मिली।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें