प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठ रहे हैं। सरकार वादे के मुताबिक रोजगार के अवसर पैदा करने में विफल साबित हुई है, जिस कारण देश की युवा आबादी का मोदी से मोहभंग हो रहा है।
रोजगार के अवसरों में कमी के कारण ही गुजरात जैसे विकसित राज्य में प्रभावी पटेल समुदाय भी सरकारी नौकरी और विश्वविद्यालयों में दाखिले में आरक्षण की मांग करने लगा है।
मोदी पिछले आम चुनाव में रोजगार के अवसर बढ़ाने के वादे के साथ सत्ता में आए थे। उन्हें युवा मतदाताओं का भारी समर्थन मिला था, लेकिन अगले करीब चार में वह अपने वादे को नहीं निभा पाए तो अगले आम चुनाव में उनकी मुश्किलें बढ़ जाएगी।
मोदी सत्ता में आने के लिए गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए वहां किए गए विकास को मुद्दा बनाया था, लेकिन राज्य में पटेल समुदाय के आरक्षण के समर्थन में आंदोलन ने उनकी नीतियों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह सवाल उठना लाजिमी है कि मोदी की नीतियां औसत गुजराती परिवार के लिए कितनी लाभदायी थीं।
मोदी सरकार की नीतियों पर उठे सवाल
भारत की विशाल कामकाजी आबादी का करीब आधा अब भी खेती पर निर्भर हैं लेकिन जीडीपी में खेती की हिस्सेदारी केवल 17 फीसदी है।
इतना ही नहीं गैर कृषि क्षेत्र में काम कर रही आधी कामकाजी आबादी में से करीब 80 फीसदी असंगठित या छोटी कंपनियों में कार्यरत हैं। भारत की सवा सौ करोड़ की आबादी में करीब आधे युवा है।
युवाओं के बल पर ही मोदी ने आम चुनाव में शानदार जीत दर्ज की थी, लेकिन उनके लिए देश में पर्याप्त नई नौकरियां पैदा नहीं हो रही हैं।
मोदी ने पीएम बनने से पहले अर्थव्यवस्था में सुधार लाने और उसे आधुनिक बनाने का वादा किया था, लेकिन उनके वादे का असर नहीं दिख रहा है। सरकार अभी तक कोई बड़ा आर्थिक सुधार नहीं कर पाई है।
अवसर की कमी के कारण पटेल आरक्षण की मांग
पटेल जैसे मध्यवर्गीय समुदाय के लिए आरक्षण की मांग आश्चर्य पैदा करता है। इसका एक कारण भारत में उच्च शिक्षा हासिल करने वालों की संख्या बढ़ना भी है।
वर्ष 2013 में देश के कॉलेज जा सकने वाले 25 फीसदी युवा उच्च शिक्षा हासिल कर रहे थे, जबकि 2003 में यह प्रतिशत केवल 11 फीसदी था। ग्रेजुएट युवाओं की भारी संख्या को देखते हुए निर्माण और सेवा क्षेत्र को बढ़ावा देने की जरूरत है,
लेकिन कंपनियां अपने ऑपरेशन का विस्तार नहीं कर रही हैं। बिजली की कमी और सरकारी लाल फीताशाही के साथ कड़े श्रम कानून सबसे बड़ी बाधा हैं।