एनडीए से नाता तोड़ने के 24 घंटे बाद ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ‘सेक्युलर’ का खिताब दे दिया।
साथ ही पीएम ने जदयू के यूपीए में शामिल होने की चर्चाओं को यह कह कर हवा भी दे दी कि राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता।
यूपीए ने बुजुर्ग नेताओं पर लगाया दांव
प्रधानमंत्री ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और फेडरल फ्रंट की तैयारियों को कांग्रेस के लिए चुनौती मानने से साफ इंकार कर दिया है।
एनडीए के टूटने से खुश प्रधानमंत्री ने ताल ठोकने के अंदाज में कहा कि यूपीए अब तीसरी पारी के लिए खुद को तैयार कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने यह कहकर मोदी पर हमला भी किया है कि देश जानता है कि मोदी किस चीज के लिए जाने जाते हैं।
जबकि पीएम ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को पार्टी और यूपीए का स्वाभाविक नेता करार देते हुए कहा कि राहुल में यूपीए और सरकार को नेतृत्व देने की क्षमता है।
उन्होंने कहा कि वह मानते हैं कि राहुल यूपीए और सरकार को नेतृत्व देने की क्षमता रखते हैं और वे उनकी जगह ले सकते हैं।
केंद्रीय मंत्रिमंडल में विस्तार के बाद प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति भवन में पत्रकारों के सवालों के खुलकर जवाब दिए।
खासतौर से उनसे एनडीए में पड़ी फूट, जदयू के यूपीए में शामिल होने की संभावना, मोदी की चुनौती और राहुल की ताजपोशी से संबंधित सवाल पूछे गए।
इस दौरान प्रधानमंत्री ने नीतीश को सेक्युलर करार दिया। जदयू के यूपीए में शामिल होने की संभावनाओं पर उन्होंने कहा कांग्रेस सेक्युलर और समान विचारधारा वाले दलों के साथ हमेशा से काम करना चाहती रही है।
राजनीति में नई परिस्थितियां बनती रहती हैं और इस कारण चीजें भी बदलती रहती हैं। जहां तक यूपीए का सवाल है तो वह हमेशा किसी भी तरह की राजनीतिक परिस्थितियों से उबर कर अच्छे नतीजे देता है।
फेडरल फ्रंट बनता है तो यूपीए के लिए चुनौती नहीं होगी? पीएम ने इस पर कहा कि फेडरल फ्रंट कोई चुनौती देता नहीं दिख रहा।
एनडीए से जदयू के अलग होने के बाद राजनीतिक हालात के बारे में पीएम ने भाजपा पर सियासी निशाना साधते हुए कि हम यूपीए की तीसरी पारी की तैयारी कर रहे हैं।