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लंच डिप्लोमेसी से माया को मनाने में जुटे मनमोहन

Mon, 12 Nov 2012 07:29 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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संसद के आगामी शीतकालीन सत्र की सरगर्मी जब बढ़ चली है, तब रविवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बसपा सुप्रीमो मायावती से लंच पर मुलाकात की।
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सरकार नहीं चाहती है कि मानसून सत्र की तरह यह सत्र रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के विरोध की भेंट चढ़ जाए। अत: वह बाहर से समर्थन दे रहे दलों को पहले से मनाने में सक्रिय हो गई है। लेकिन मायावती ने एफडीआई के मुद्दे पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

एफडीआई पर संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाने को लेकर तृणमूल कांग्रेस की योजना पर भी बसपा के रुख को मायावती ने स्पष्ट नहीं किया। हालांकि प्रमोशन में आरक्षण के विधेयक को जल्द पारित कराने के लिए उन्होंने संसद के शीतकालीन सत्र में फिर से मांग करने की बात कही है। 22 नवंबर से संसद का नया सत्र शुरू होगा।
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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने मीडिया से कहा कि राजनीतिक बैठकें हुआ करती हैं। इसके ज्यादा अर्थ न लगाएं। हम सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं। प्रधानमंत्री ने मुझे दोपहर भोज पर आमंत्रित किया। संसद सत्र शुरू होने वाला है, लेकिन यह कहना गलत है कि मैं केवल उसी वजह से आई। मैं कई और मौकों पर उनसे मिली हूं।

तृणमूल की ओर से एफडीआई मुद्दे पर सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के मसले पर यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री ने सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि लखनऊ में नौ अक्टूबर की पार्टी रैली में मैंने इस पर विस्तार से चर्चा की थी। हम जो कदम उठाएंगे वह उसी रैली में कही बातों के आधार पर होगा।

उल्लेखनीय है कि मायावती ने दस अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि पार्टी के सदस्यों ने मुझे संप्रग को समर्थन देने के मामले में अंतिम फैसला लेने के लिए अधिकृत किया है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक मैंने इस मुद्दे पर कोई विचार नहीं किया है। याद रहे कि मायावती ने लोकसभा चुनाव निर्धारित समय से पहले होने का संकेत दिया था और पार्टीजनों को इसके लिए तैयार रहने को कहा था।

मायावती ने उनकी पार्टी की ओर से सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों को प्रोन्नति में आरक्षण देने के लिए विधेयक जल्द पारित कराने की मांग फिर से करने को कहा है। उन्होंने कहा कि विधेयक को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। पिछले सत्र के संपन्न होने में जब दो या तीन दिन ही रह गए थे। तब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया था।

मालूम हो कि कुछ ही दिन पहले प्रधानमंत्री ने सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और उनके पुत्र उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को रात्रिभोज दिया था। तृणमूल के संप्रग से बाहर होने के बाद सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे सपा-बसपा के साथ बैठकों को संबंध मजबूत करने केप्रयास के रूप में देखा जा रहा है। लोकसभा में सपा के 22 और बसपा के 21 सांसद हैं।
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आने वाले दिनों में राकांपा, द्रमुक और रालोद जैसे अन्य घटक दलों के नेताओं की भी प्रधानमंत्री से मुलाकात की संभावना है। रविवार को प्रधानमंत्री से मुलाकात के वक्त मायावती के साथ जहां उनकी पार्टी के नेता सतीश मिश्रा मौजूद थे। वहीं संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि हाल ही में हुए मंत्रिमंडलीय फेरबदल में कमलनाथ को संसदीय कार्य मंत्रालय दिया गया है।
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