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सुरक्षा लेने से कब तक बचेंगे केजरीवाल?

Thu, 09 Jan 2014 07:12 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्रियों पर सुरक्षा लेने का दबाव बढ़ता जा रहा है। बुधवार को दिल्ली पुलिस ने अरविंद केजरीवाल की सुरक्षा के लिए एक टीम भेजी थी, लेकिन उन्होंने लौटा दिया।
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वहीं, केजरीवाल और उनके मंत्रियों की सुरक्षा का मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। एक अधिवक्ता ने सुरक्षा लेने का आदेश देने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका भी दायर की है।

हिंदू रक्षा दल के हमले के बाद आम आदमी पार्टी के कौशांबी स्थित कार्यालय और दिल्ली सचिवालय की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

सीएम ने लौटाई दिल्ली पुलिस की सुरक्षा

बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली पुलिस की सुरक्षा लौटा दी। दिल्ली पुलिस की एक टीम अरविंद केजरीवाल की सुरक्षा में दिल्ली कैंट इलाके में गई थी।

दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (सिक्योरिटी) जेके शर्मा ने बताया कि केजरीवाल का बुधवार को दिल्ली कैंट में कार्यक्रम था। पुलिस को इसकी सूचना मिल गई थी।

मुख्यमंत्री कार्यालय से कार्यक्रम की जानकारी नहीं दी गई थी। दिल्ली पुलिस ने भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिसकर्मी भेजे थे।

कार्यक्रम के खत्म होने के बाद इंस्पेक्टर ने मुख्यमंत्री से सुरक्षा लेने व एस्कॉर्ट करने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। पुलिसकर्मियों ने जब साथ चलने की बात कही तो उन्होंने इसके लिए भी मना कर दिया।

सुरक्षा लेने का आदेश देने को याचिका

एक अधिवक्ता ने दिल्‍ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर केजरीवाल और उनके मंत्रियों को सुरक्षा लेने का आदेश देने का आग्रह किया है।

न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदंल की खंडपीठ के समक्ष पेश अधिवक्ता अनूप प्रकाश ने याचिका पेश करते हुए मामले को तुरंत सुनने का आग्रह किया।

हालांकि खंडपीठ ने कहा कि मुद्दे पर जल्द सुनवाई का कोई औचित्य नहीं है। सुरक्षा एजेंसियां इस मुद्दे पर विचार कर रही हैं। अत: वे तय नियमों के तहत याचिका दायर करें।

मंत्रियों-नेताओं की हत्या का हवाला

याचिका में कई मंत्रियों व नेताओं की हत्या का हवाला देते हुए कहा गया है कि कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों को सुरक्षा मिली हुई है।

वर्तमान में कई आतंकी गुट, अपराधी और माफिया सक्रिय हैं। ऐसे में राजनीतिक दुश्मनी का खतरा देखते हुए केजरीवाल व उनके मंत्रियों को सुरक्षा न लेने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।

वहीं, सुरक्षा न लेने के निर्णय से दस गुना अधिक पुलिस तैनात की जा रही है और ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री की सुरक्षा मुद्दा उनका व्यक्तिगत मुद्दा नहीं है। यह मुद्दा राज्य व सुरक्षा एजेंसियों का है। अत: केंद्र सरकार व दिल्ली पुलिस को केजरीवाल और अन्य मंत्रियों को उचित सुरक्षा व्यवस्था देने का निर्देश दिया जाए।
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सचिवालय की सुरक्षा बढ़ी, एसएसबी तैनात

दिल्ली सचिवालय की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। दिल्ली पुलिस के अलावा सीमा सुरक्षा बल के जवान भी बुधवार को तैनात रहे। इसे आम आदमी पार्टी के कौशांबी दफ्तर पर हुए हमले से जोड़कर देखा जा रहा है।

हालांकि, पुलिस का कहना है कि मुख्यमंत्री की तरफ से घोषित सचिवालय में जनता दरबार की वजह से भीड़ को ध्यान में रखकर फोर्स नियंत्रण के लिए बुलाई गई है। अब जब जनता दरबार लगेगा, तभी फोर्स आएगी।

बुधवार को सीमा सुरक्षा बल के जवान सचिवालय के बाहर सड़क पर तैनात रहे। इतना ही नहीं सुबह एक तरफ की सड़क पर बेरिकेड लगाकर गेट नंबर 4 व 5 के पास रास्ता बंद रखा गया। इससे यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को दूसरी तरफ की सड़क का इस्तेमाल करना पड़ा।
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