मुनाफाखोर चीन से नकली यानी प्लास्टिक का चावल मंगाकर इसे असली चावल में मिलाकर बेच रहे हैं। जब से यह जानकारी फैलनी शुरू हुई है, लोगों के माथे पर बल पड़ गए हैं।
क्या है अंतर : देखने में बिल्कुल असली चावल जैसा। रंग और आकार में भी पूरी तरह मेल खाता हुआ। इसलिए देखकर पहचान थोड़ा कठिन है। इतना ही नहीं पकाने के लिए आंच पर रखने के बाद गलता भी जल्दी है।
कैसे पहचानें : चावल को पतीले में रखकर थोड़ा उबालिए। कुछ समय बाद थोड़ा सा चावल निकालकर ठोस धरातल पर फैला दीजिए। अब चावल को दबाइए। ऐसे में जो चावल का दाना अधिक कड़ा है, वही समझिए कि नकली है। अभी भी न पता चल पा रहा हो तो थोड़ा सा चावल का मांड़ (सूप) लेकर चखिए।
यहां काफी बिकता है ये चावल
यदि इसमें से प्लास्टिक सा स्वाद आए और कड़वा लगे तो समझिए कि नकली चावल
मिला है। एक तरीका और है, थोड़ा सा चावल लेकर जलाइए, नकली चावल मिला होगा
तो प्लास्टिक की गंध के साथ जलेगा।
कहां बनता है : प्लास्टिक का चावल चीन में बनता है। शांजी प्रांत के ताइयुआन में यह काफी बिकता है।
कैसे
बनता है : आलू को चावल के आकार में तैयार करके उसमें इंडस्ट्रियल सिंथेटिक
रेजिन मिलाया जाता है। इसे अच्छी तरह से तबतक मिलाया जाता है, जबतक कि
चावल के रंग में न नजर आने लगे।
करें दुकानदार के खिलाफ शिकायत
निर्यात : चीन से यह चावल भारत के बाजारों में पहुंच चुका है। वियतनाम, सिंगापुर, इंडोनोेशिया में भी इसका निर्यात हो रहा है।
क्या
है नुकसान : प्लास्टिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने के साथ-साथ अपाच्य
है। इसलिए इसको खाने से पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है। पेट की बीमारी
होती है।
क्या करें : इस तरह का चावल पकड़ में आते ही तत्काल दुकानदार के खिलाफ शिकायत करें। याद रखें मिलावट एक दंडनीय अपराध है और आपको उचित
मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण सामान देना दुकानदार की जिम्मेदारी है।