आपने कारों और डोलियों में दुल्हन को विदा होते देखा होगा, लेकिन दुल्हन को घोड़े पर बैठकर ससुराल जाते नहीं देखा होगा। यदि देखना है तो आपको चमोली जनपद के दूरस्थ इलाके के गांवों का रुख करना पड़ेगा। यहां सदियों से दुल्हन की विदाई घोड़े पर बैठाकर करने की परंपरा है। देवाल विकासखंड के गांव वाण और कुलिंग में ग्रामीण इस परंपरा को खुशहाली का प्रतीक मानते हैं।
डोली में सिर्फ बैठती हैं पार्वती
वाण और कुलिंग गांव में लाटू देवता को ईष्ट के रूप में पूजा जाता है। लाटू देवता की बहन मां पार्वती को भी आराध्य देवी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि देवी यात्रा (राजजात और लोकजात) में ग्रामीण देवी को डोली में बैठाकर कैलास ले जाते हैं। जिसकी अगवानी उनके भाई लाटू देवता करते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, डोली में देवी के अलावा यहां किसी को नहीं बिठाया जाता है इसलिए बेटियों को घोड़ों में विदा किया जाता है।
दूसरे गांवों की दुल्हनें भी उतर जाती हैं डोली से
ग्रामीण हयात सिंह ने बताया कि वाण और कुलिंग लाटू की भूमि है। यहां न तो दुल्हन डोली में बैठकर विदा होती है और न ही प्रवेश करती है। यदि समीपस्थ गांवों की बारातें भी इस गांव से गुजरती हैं तो दुल्हन डोली से उतर जाती है।
पांचवें धाम के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव
वहीं गढ़वाल के सांसद सतपाल महाराज ने बताया कि वाण लाटू देवता का ऐतिहासिक मंदिर एक धाम के रूप में है। जो इस गांव का रक्षक भी है। संसद में इसे पांचवें धाम के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसे जल्द ही मंजूरी मिल सकती है।