उत्तर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को पीएचडी प्रवेश परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों का पंजीकरण दिसंबर तक हर हाल में कराने का फैसला लिया गया है। इसके बाद अभ्यर्थियों का पंजीकरण नहीं कराया जाएगा। सभी सफल अभ्यर्थियों को पहले फंडामेंटल कोर्स करना होगा, इसके बाद फिर से परीक्षा देने के बाद ही वह पीएचडी कर सकेंगे। यह फैसला डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय में हुई कुलपतियों की बैठक में लिया गया है।
कुलपतियों की बैठक में यह भी तय किया गया है कि सभी विश्वविद्यालय यूजीसी के मानकों के अनुरूप पीजी और यूजी में सेमेस्टर प्रणाली लागू करें। बैठक में बताया गया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) अपने सुधारों को लागू कराने के लिए पूरी तरह से दृढ़ है और कई बार प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालयों को पत्र लिख चुका है।
हाल ही में यूजीसी ने चेतावनी दी थी कि अगर वह सुधारों को नहीं लागू करेंगे तो यूजीसी न केवल अनुदान रोक लेगा बल्कि उनकी मान्यता भी रद कर सकता है। बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी विश्वविद्यालय पाठ्यक्रमों में संशोधन कर लें। पाठ्यक्रमों में बदलाव के बाद एक समान पाठ्यक्रम लागू हो पाएगा। पहले विश्वविद्यालयों ने 63 पाठ्यक्रमों में एक समान पाठ्यक्रम लागू किया था। अब 50 और विषयों को इसमें जोड़ने का फैसला किया गया। इसे यूजीसी के माडल विषयों के आधार पर तैयार किया जाए।
कुछ विश्वविद्यालय के कुलपतियों ने बैठक में कहा कि वह पीएचडी में कामन इंट्रेंस टेस्ट से खुद को अलग रखने के लिए मानव संसाधन मंत्रालय और यूजीसी को पत्र लिखेंगे। शासन को इसके लिए भी पत्र भेजा जाएगा कि विश्वविद्यालय अपने स्तर पर ही परीक्षा करा लें। बैठक की अध्यक्षता डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आरसी सारस्वत ने की। बैठक में कई विश्वविद्यालयों के कुलपति मौजूद थे।