अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में रिकार्ड कमी होने के बाद घरेलू बाजार में डीजल और पेट्रोल की कीमतों में कमी के आसार फिर से दिखने लगे हैं।
हालांकि सरकारी तेल विपणन कंपनियां अभी भी दाम में कमी करने में आनाकानी कर रही हैं। इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 45 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे चली गई है, जो कि छह वर्ष का न्यूनतम स्तर है।
इस हिसाब से देखें तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर कम से कम दो रुपये की कटौती के आसार हैं। लेकिन पेट्रोलियम कंपनियां अभी भी दाम घटाने पर ना-नुकुर कर रही हैं।
इस समय लगभग हर हफ्ते कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय तौर पर कमी हो रही है लेकिन डीजल-पेट्रोल की कीमतों में उस तरह से कमी नहीं हुई है। इससे पहले 15 दिसंबर को दोर्नो इंधनों की कीमतों में प्रति लीटर दो-दो रुपये की कटौती हुई थी।
उसके बाद 31 दिसंबर को भी कीमतों में कटौती के आसार थे, लेकिन उपभोक्ताओं को राहत देने के बजाय सरकार ने इस पर उत्पाद शुल्क बढ़ा दिया। अब जबकि कच्चा तेल 45 डॉलर के आस-पास आ गया है तो फिर से इसकी आस बंधी है।