उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी व सपा सांसद डिंपल यादव के निर्विरोध निर्वाचन के लिए साजिश रचे जाने का आरोप लगाते हुए खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि उसे और अन्य उम्मीदवारों को नामांकन पत्र ही नहीं भरने दिया गया। उनका अपहरण कर एक कमरे में बंद कर दिया गया था। याचिका में इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई है, जिस पर सर्वोच्च अदालत 17 जनवरी को सुनवाई करेगी।
शीर्षस्थ अदालत में दायर अपनी याचिका में भारत गांधी व प्रभात पांडेय ने अपने लिए तत्काल सुरक्षा की मांग की है। याचिका के मुताबिक पांडेय गत वर्ष 5 जून को वोटर्स पार्टी इंटरनेशल (वीपीआई) के उम्मीदवार के तौर पर नामांकन कराने के लिए जिला मजिस्ट्रेट, कन्नौज के कार्यालय पहुंचे थे, जहां उसके पर्चे को बिना कारण स्पष्ट किए रिटर्निंग अधिकारी ने अस्वीकार कर दिया। इसकी सूचना मुख्य चुनाव आयुक्त को दी गई।
उसके बाद शाम को सपा नेता नवाब सिंह यादव ने वीपीआई अध्यक्ष गांधी को फोन किया और पांडेय को चुनाव न लड़ने की धमकी दी। हालांकि पांडेय ने अपना नामांकन पत्र फैक्स के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त को भेज दिया। इसके बाद जब पांडेय रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय पहुंचे तो वहां पहले से मौजूद कुछ लोगों ने गन प्वाइंट पर उनका अपहरण कर लिया।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि पांडेय ने अपहरण के बाद खुद को एक कमरे में पाया। जहां पहले से ही कई लोग बैठे थे जो इस चुनाव में नामांकन करना चाहते थे। उन सभी का अपहरण कर लिया गया था और उन्हें कमरे में बंद कर दिया गया था। अगले दिन 6 जून को दोपहर तीन बजे सभी को छोड़ दिया गया, लेकिन तब तक नामांकन पत्र भरने का समय समाप्त हो चुका था।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक उन्होंने पुलिस, राज्य के मुख्यमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्रालय और राष्ट्रपति भवन को इस अनियमितता की शिकायत भेजी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से इस मामले में गत वर्ष 19 जुलाई को मुख्यमंत्री को नोटिस भी जारी किया गया था।
याचिका में कहा गया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में कन्नौज लोकसभा सीट के उपचुनाव को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं को इस बीच जान से मारने की धमकी भी मिली है।