शुक्रवार को बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में रावण दहन के बाद हुई भगदड़ के बाद अब पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) के इमरजेंसी वॉर्ड के बाहर अफरा-तफरी का माहौल है।
जिनके परिजन या परिचित घायल हुए हैं वे यह पता नहीं कर पा रहे हैं कि उनकी हालत कैसी है। कई लोग अपने रिश्तेदारों को ढूंढ रहे हैं और उनको अंदर जाने की अनुमति नहीं मिल पा रही है।
पटना में वकील अंजुम बारी घटना के वक़्त गांधी मैदान के बाहर थे। वह कहते हैं, "मैं रामगुलाब चौक के बाहर खड़ा था। अचानक लोगों के चीखने की आवाज़ें सुनाई देने लगीं। बाबू बचाओ, मैया गे, बाबू गे ऐसी आवाज आने लगी थी।"
वह कहते हैं, "जब मैं गया तो वहां भगदड़ का माहौल था। लोग भाग रहे थे कई लोगों को हमने उठाया। उनके मुंह पर पानी डाला। मैंने क़रीब 25 लोगों की मदद की। वहां प्रशासन के लोग पर्याप्त नहीं थे और वे उतनी चुस्ती के साथ काम नहीं कर पा रहे थे जिसकी वजह से यह घटना हुई।"
अंजुम बारी कुछ घायलों को लेकर पीएमसीएच आए तो उनके मुताबिक यहां की स्थिति और भयावह थी।